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अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट: दान में चोरी के आरोपों से उपजा विवाद, जांच की मांग तेज

ICN24 Newsroom 5 जुल॰ 2026, 01:31 pm
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट: दान में चोरी के आरोपों से उपजा विवाद, जांच की मांग तेज

अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट पर दान की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे भारतीय समुदाय और प्रवासियों के बीच चिंता बढ़ गई है।

अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर हिंदू समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण रहा है। हालांकि, हाल ही में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर दान की चोरी और वित्तीय हेराफेरी के गंभीर आरोप लगने के बाद यह प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट विवादों के घेरे में आ गया है। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित यह मंदिर, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और संघ परिवार के सबसे महत्वपूर्ण वैचारिक और राजनीतिक लक्ष्यों में से एक रहा है, अब प्रशासन और पारदर्शिता को लेकर कड़ी जांच का सामना कर रहा है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ट्रस्ट के भीतर दान की गई राशि और सामग्रियों के प्रबंधन में भारी गड़बड़ी की खबरें आई हैं। विपक्ष और कुछ स्वतंत्र पर्यवेक्षकों ने आरोप लगाया है कि मंदिर निर्माण के लिए दुनिया भर से जुटाए गए धन का सही हिसाब-किताब नहीं रखा जा रहा है। चोरी और वित्तीय हेरफेर के इन दावों ने मंदिर के निर्माण कार्य की सुचिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक हलकों में भी इसकी गूंज सुनाई दे रही है, जहां विपक्षी दलों ने केंद्र और राज्य सरकार पर मंदिर के नाम पर राजनीति करने और धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष चिंता का विषय है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में प्रवासी भारतीयों ने मंदिर निर्माण के लिए उदारतापूर्वक दान दिया था। ऑस्ट्रेलिया में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों और रैलियों के माध्यम से फंड इकट्ठा किया गया था। ऐसे में, चोरी और घोटाले की खबरें उन हजारों प्रवासियों के भरोसे को प्रभावित कर सकती हैं जिन्होंने इस मंदिर को अपनी आस्था और पहचान का केंद्र माना है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या उनकी मेहनत की कमाई का उपयोग सही तरीके से किया जा रहा है या नहीं। भाजपा ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है। ट्रस्ट के अधिकारियों का कहना है कि सभी लेनदेन पारदर्शी हैं और ऑडिट की प्रक्रिया जारी है। हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि चूंकि यह मंदिर सार्वजनिक दान से बना है, इसलिए ट्रस्ट को पाई-पाई का हिसाब सार्वजनिक करना चाहिए। भूमि खरीद के पिछले विवादों को याद करते हुए, विपक्षी नेताओं ने एक निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि भक्तों की आस्था को ठेस न पहुंचे। जैसे-जैसे यह मामला तूल पकड़ रहा है, यह स्पष्ट है कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि पारदर्शिता और सुशासन की एक बड़ी परीक्षा बन गया है। आने वाले समय में, ट्रस्ट की जवाबदेही ही यह तय करेगी कि करोड़ों लोगों की आस्था का यह केंद्र विवादों से मुक्त हो पाता है या नहीं। ICN24 इस मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय को पल-पल की जानकारी उपलब्ध कराता रहेगा।
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