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संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका की आप्रवासन नीति पर जताई चिंता, वर्ल्ड कप से पहले सुरक्षा और भेदभाव पर उठाये सवाल

ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 10:30 am
संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका की आप्रवासन नीति पर जताई चिंता, वर्ल्ड कप से पहले सुरक्षा और भेदभाव पर उठाये सवाल

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने अमेरिका की सख्त आप्रवासन नीतियों और निगरानी तंत्र की आलोचना करते हुए इसमें बड़े बदलाव की मांग की है।

जिनेवा: संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवाधिकार अधिकारी ने बुधवार को वैश्विक आप्रवासन नीतियों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रणाली में 'व्यापक पुनर्विचार' का आह्वान किया है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने यह बयान 48 देशों के बीच होने वाले 39 दिवसीय आगामी विश्व कप टूर्नामेंट की शुरुआत से ठीक पहले दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा नीतियां अक्सर मानवाधिकारों के उल्लंघन का कारण बनती हैं और इनमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है। जेनेवा में बोलते हुए, तुर्क ने 'नस्लीय प्रोफाइलिंग, अत्यधिक निगरानी और सख्त आप्रवासन प्रवर्तन' जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि बड़े खेल आयोजनों के दौरान सुरक्षा के नाम पर अक्सर हाशिए पर रहने वाले समुदायों और प्रवासियों को निशाना बनाया जाता है। तुर्क के अनुसार, अमेरिका जैसे देशों को अपनी सीमाओं के प्रबंधन और सुरक्षा प्रोटोकॉल को मानवाधिकारों के चश्मे से देखने की जरूरत है, न कि केवल कानून प्रवर्तन के दृष्टिकोण से। ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। हालांकि यह टिप्पणी मुख्य रूप से अमेरिकी नीतियों पर केंद्रित है, लेकिन वैश्विक स्तर पर आप्रवासन के नियमों में आने वाले बदलावों का असर भारतीय प्रवासियों पर भी पड़ता है। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों में भारतीय समुदाय की एक बड़ी उपस्थिति है, जो अक्सर वीजा नीतियों और सीमा सुरक्षा प्रोटोकॉल से सीधे प्रभावित होते हैं। तुर्क की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में दक्षिणपंथी राजनीति और आप्रवासन पर कड़े रुख को लेकर बहस छिड़ी हुई है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने चेतावनी दी कि यदि नीतियों में सुधार नहीं किया गया, तो यह न केवल प्रवासियों के अधिकारों का हनन करेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और वैश्विक एकजुटता को भी प्रभावित करेगा। उन्होंने सरकारों से आग्रह किया कि वे आप्रवासन को एक आपराधिक समस्या के बजाय एक मानवीय और प्रशासनिक मुद्दे के रूप में देखें। विश्व कप जैसे वैश्विक मंच का उपयोग समावेशिता और विविधता के जश्न के रूप में होना चाहिए, न कि सख्त निगरानी के लिए एक बहाने के रूप में। यह पहली बार नहीं है जब संयुक्त राष्ट्र ने पश्चिमी देशों की सीमा नीतियों की आलोचना की है। पिछले कुछ वर्षों में, अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर स्थितियों और प्रवासियों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने बार-बार चिंता व्यक्त की है। तुर्क ने अंत में कहा कि एक ऐसी दुनिया में जहां लोग काम, सुरक्षा और बेहतर जीवन के लिए यात्रा करते हैं, वहां आप्रवासन प्रणालियों को अधिक मानवीय और पारदर्शी होना अनिवार्य है।
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