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'हमें चुनने का मौका नहीं मिलता..': गूगल सीईओ सुंदर पिचाई ने छात्रों को दिया सफलता का खास मंत्र

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 04:10 pm
'हमें चुनने का मौका नहीं मिलता..': गूगल सीईओ सुंदर पिचाई ने छात्रों को दिया सफलता का खास मंत्र

गूगल सीईओ सुंदर पिचाई ने स्टैनफोर्ड के छात्रों को संबोधित करते हुए कठिन चुनौतियों को स्वीकार करने और आशावादी बने रहने की सलाह दी।

गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई ने हाल ही में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के 'क्लास ऑफ 2026' के छात्रों को संबोधित करते हुए जीवन के अनमोल मंत्र साझा किए। पिचाई ने अपने संबोधन में आशावाद (optimism) और चुनौतीपूर्ण कार्यों के प्रति समर्पण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि कठिन समय में अडिग रहने की क्षमता से आती है। पिचाई के भाषण का मुख्य बिंदु यह था कि 'हमें वह युग चुनने का मौका नहीं मिलता जिसमें हम पैदा होते हैं।' उनका तात्पर्य यह था कि दुनिया की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं, लेकिन हम उन परिस्थितियों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया खुद तय कर सकते हैं। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे बाहरी दबाव या समाज की अपेक्षाओं के बजाय अपने वास्तविक जुनून (passion) को पहचानें और उस पर काम करें। उनका मानना है कि जब काम दिल से किया जाता है, तो सफलता के मायने बदल जाते हैं। यह संदेश ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय परिवार अक्सर शिक्षा और करियर को लेकर काफी गंभीर रहते हैं। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिसबेन जैसे शहरों में रह रहे भारतीय मूल के युवाओं के लिए पिचाई एक वैश्विक प्रेरणास्रोत हैं, क्योंकि उनका अपना सफर भी एक प्रवासी के रूप में शुरू हुआ था। पिचाई की सलाह उन छात्रों के लिए बहुत प्रासंगिक है जो अक्सर पारंपरिक करियर और अपने निजी सपनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के प्रतिस्पर्धी बाजार में, पिचाई का यह मंत्र कि 'कठिन समस्याओं को हल करने पर ध्यान दें', युवाओं को नए रास्ते खोलने की हिम्मत देता है। अपने निजी अनुभवों को साझा करते हुए पिचाई ने बताया कि कैसे निरंतरता और आगे बढ़ने की जिद ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि अर्थपूर्ण कार्य हमेशा कठिन रास्तों से ही निकलते हैं। उन्होंने छात्रों को आगाह किया कि वे तात्कालिक परिणामों की चिंता करने के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएं। उनके अनुसार, तकनीकी विकास के इस दौर में, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच, रचनात्मकता और समस्या समाधान की सोच ही सबसे बड़ा हथियार है। अंत में, सुंदर पिचाई ने आशावाद को एक 'रणनीतिक लाभ' बताया। उन्होंने कहा कि अनिश्चितता के दौर में भी जो लोग सकारात्मक रहते हैं और हार नहीं मानते, वही दुनिया में बड़े बदलाव लाते हैं। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे असफलताओं से डरे बिना लगातार प्रयास करते रहें, क्योंकि भविष्य उन्हीं का है जो मुश्किलों में भी अवसर तलाशने का साहस रखते हैं।
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