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हरियाणा: पुलिस थाने में कैंसर मरीज के साथ कुकर्म, तीन पुलिसकर्मी सस्पेंड; एसआईटी गठित
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 04:55 pm
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में एक कैंसर मरीज के साथ पुलिस स्टेशन में कथित तौर पर यौन उत्पीड़न और मारपीट का मामला सामने आया है। इस संबंध में तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले से एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 30 वर्षीय कैंसर सर्वाइवर (कैंसर से जंग जीतने वाले व्यक्ति) ने पुलिस हिरासत के दौरान गंभीर शारीरिक और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो सहायक उप-निरीक्षकों (ASI) और एक होमगार्ड को निलंबित कर दिया है। यह घटना न केवल मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला है, बल्कि पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
पीड़ित के अनुसार, यह पूरी घटना एक मामूली विवाद के बाद शुरू हुई, जिसके बाद उसे थाने ले जाया गया। आरोप है कि थाने के भीतर पुलिसकर्मियों ने उसके साथ न केवल मारपीट की, बल्कि उसके साथ कुकर्म (अप्राकृतिक यौन संबंध) जैसा घृणित अपराध भी किया। पीड़ित पहले से ही कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहा है, जिससे उसकी शारीरिक स्थिति काफी नाजुक है। इस अमानवीय व्यवहार ने उसकी स्वास्थ्य स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है।
कुरुक्षेत्र पुलिस ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर ली है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि वर्दी की आड़ में किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी इस तरह की खबरें चिंता का विषय होती हैं। प्रवासी भारतीय अक्सर भारत में कानून व्यवस्था और मानवाधिकारों की स्थिति पर गहरी नजर रखते हैं। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस सुधारों और हिरासत में होने वाली हिंसा (custodial violence) के खिलाफ सख्त कानूनों की आवश्यकता को रेखांकित किया है। पीड़ित की स्वास्थ्य स्थिति और उसकी सुरक्षा को लेकर स्थानीय प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है, ताकि उसे न्याय मिल सके।
वर्तमान में, एसआईटी पीड़ित के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है। चिकित्सा परीक्षण की रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्य इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मानवाधिकार संगठनों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है और मांग की है कि मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में की जाए ताकि पीड़ित को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।
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