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आज का पंचांग 4 जुलाई 2026: आषाढ़ चतुर्थी के बाद पंचमी का आगमन, जानें नक्षत्र और शुभ योग का महत्व
ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 10:31 am
4 जुलाई 2026 को आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी दोपहर 12:39 बजे तक रहेगी, जिसके बाद पंचमी तिथि प्रारंभ होगी। जानें आज के शुभ मुहूर्त और नक्षत्रों की गणना।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, 4 जुलाई 2026 का दिन आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि आज दोपहर 12:39 बजे तक प्रभावी रहेगी, जिसके पश्चात पंचमी तिथि का आरंभ होगा। सनातन धर्म में तिथियों का यह परिवर्तन न केवल धार्मिक अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि दैनिक गतिविधियों के प्रबंधन के लिए भी शुभ माना जाता है।
आज के पंचांग की गणना के अनुसार, सूर्य वर्तमान में उत्तरायण की स्थिति में हैं और उत्तर गोल में संचार कर रहे हैं। भारत में यह समय वर्षा ऋतु का है, जो कृषि और प्रकृति के पुनर्जीवन का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आज धनिष्ठा नक्षत्र दोपहर 01:43 बजे तक रहेगा, जिसके बाद शतभिषा नक्षत्र की शुरुआत होगी। धनिष्ठा नक्षत्र को ऊर्जा और गतिशीलता का प्रतीक माना जाता है, जबकि शतभिषा नक्षत्र उपचार और आध्यात्मिक विकास से जुड़ा है।
ग्रहों के गोचर की बात करें तो चंद्रमा आज दिन-रात कुंभ राशि में संचरण करेंगे। कुंभ राशि में चंद्रमा का होना मानसिक स्थिरता और सामाजिक कार्यों के प्रति झुकाव को दर्शाता है। इसके साथ ही, आज योगों की स्थिति भी विशेष है। सायं 05:02 बजे तक प्रीति योग रहेगा, जिसके बाद आयुष्मान योग का आरंभ होगा। प्रीति योग को आपसी संबंधों को सुधारने और प्रेम बढ़ाने के लिए उत्तम माना जाता है, वहीं आयुष्मान योग दीर्घायु और स्वास्थ्य लाभ के लिए शुभ है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए, पंचांग की इन गणनाओं को स्थानीय समयानुसार समायोजित करना आवश्यक है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में समय का अंतर होने के कारण, श्रद्धालुओं को पूजा-पाठ और विशेष अनुष्ठानों के लिए स्थानीय पंचांग का परामर्श लेना चाहिए। भारतीय सांस्कृतिक नेटवर्क (ICN24) अपने पाठकों को सलाह देता है कि राहुकाल के दौरान किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से बचें। आज राहुकाल का समय दोपहर के अंतराल में रहेगा, जो आमतौर पर शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है।
अंत में, आज का दिन अनुशासन और धैर्य के साथ कार्य करने का है। वर्षा ऋतु के आगमन और आषाढ़ मास की पवित्रता के बीच, चतुर्थी और पंचमी का यह संगम जीवन में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है। विशेष रूप से वे लोग जो कला या संगीत के क्षेत्र से जुड़े हैं, उनके लिए धनिष्ठा नक्षत्र का प्रभाव सकारात्मक परिणाम ला सकता है।
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