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SRFI PSA चैलेंजर स्क्वैश: दो गेम से पिछड़ने के बाद तन्वी खन्ना ने रचा इतिहास, खिताब पर किया कब्जा

ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 02:31 am
SRFI PSA चैलेंजर स्क्वैश: दो गेम से पिछड़ने के बाद तन्वी खन्ना ने रचा इतिहास, खिताब पर किया कब्जा

भारतीय स्क्वैश स्टार तन्वी खन्ना ने मुंबई में आयोजित एसआरएफआई पीएसए चैलेंजर के फाइनल में मिस्र की फरीदा वालिद को हराकर शानदार जीत दर्ज की।

मुंबई में आयोजित एसआरएफआई पीएसए चैलेंजर स्क्वैश टूर्नामेंट के महिला फाइनल में भारत की स्टार खिलाड़ी तन्वी खन्ना ने अपनी अदम्य खेल भावना और मानसिक मजबूती का परिचय देते हुए खिताब जीत लिया है। एक समय हार के कगार पर खड़ी तन्वी ने मिस्र की फरीदा वालिद के खिलाफ जबरदस्त वापसी की और दो गेम से पिछड़ने के बावजूद पासा पलटते हुए जीत अपने नाम की। खेल प्रेमियों के लिए यह मुकाबला किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं था, जहां शुरुआती झटकों के बाद तन्वी ने अपनी रणनीति बदली और चैंपियन बनकर उभरीं। मैच की शुरुआत तन्वी के लिए बेहद निराशाजनक रही थी। मिस्र की उभरती हुई खिलाड़ी फरीदा वालिद ने पहले दो गेमों में अपनी आक्रामक शैली से भारतीय खिलाड़ी को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया था। शुरुआती दोनों गेमों में तन्वी काफी सुस्त नजर आ रही थीं और उनके शॉट में वह पैनापन नहीं दिख रहा था जिसके लिए वे जानी जाती हैं। फरीदा ने कोर्ट पर अपनी गति और चतुराई भरे प्लेसमेंट से तन्वी को लगातार छकाया। ऐसा लग रहा था कि मैच सीधे गेमों में समाप्त हो जाएगा और खिताब फरीदा के पास चला जाएगा। हालांकि, तीसरे गेम से कहानी पूरी तरह बदल गई। तन्वी खन्ना, जो अपनी फिटनेस और कोर्ट कवरेज के लिए जानी जाती हैं, ने खेल में बदलाव किया। उन्होंने फरीदा की लंबी रैलियों के जवाब में नेट पर ड्रॉप शॉट्स का शानदार इस्तेमाल शुरू किया। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा, तन्वी की थकान कम होती दिखी और उनकी ऊर्जा का स्तर (फिजी मोड) बढ़ता गया। उन्होंने न केवल स्कोर बराबर किया, बल्कि निर्णायक गेम में फरीदा पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बना लिया। भारतीय स्क्वैश के लिए यह जीत विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह गर्व का क्षण है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों देशों में स्क्वैश एक प्रतिष्ठित खेल रहा है। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में भारतीय मूल के कई युवा अब पेशेवर स्क्वैश को अपना रहे हैं और तन्वी जैसी खिलाड़ियों की सफलता उनके लिए प्रेरणा का स्रोत बनती है। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच स्क्वैश की प्रतिद्वंद्विता हमेशा से चर्चा में रही है, ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरना इस खेल की लोकप्रियता को और बढ़ा रहा है। इस खिताबी जीत के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि तन्वी खन्ना का यह प्रदर्शन उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। दो गेम हारने के बाद वापसी करना किसी भी खिलाड़ी के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन तन्वी ने साबित किया कि उनके पास शीर्ष स्तर के दबाव को झेलने की क्षमता है। यह जीत न केवल उन्हें रैंकिंग में ऊपर ले जाएगी, बल्कि आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए भी उनका मनोबल बढ़ाएगी।
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