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'आदेश मानें या जेल जाएं': दहयाभाई जमीन विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट की ठाणे नगर निगम को कड़ी फटकार
ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 09:31 am

बंबई उच्च न्यायालय ने ठाणे नगर निगम को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अदालती आदेशों की अनदेखी करने पर अधिकारियों को जेल भेजा जा सकता है।
बंबई उच्च न्यायालय ने प्रशासन की सुस्ती और न्यायिक आदेशों की अवहेलना पर कड़ा रुख अपनाते हुए ठाणे नगर निगम (TMC) को कड़ी फटकार लगाई है। एक लंबे समय से लंबित भूमि विवाद मामले में अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "अवमानना के मामले में, आप या तो आदेश का पालन करते हैं या जेल जाते हैं।" यह टिप्पणी जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस कमल खाता की खंडपीठ ने मेसर्स डी. दहयाभाई एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की।
यह मामला ठाणे में भूमि अधिग्रहण के बदले विकास अधिकार प्रमाणपत्र (DRC) और हस्तांतरणीय विकास अधिकार (TDR) जारी करने में होने वाली अत्यधिक देरी से संबंधित है। याचिकाकर्ता कंपनी लंबे समय से अपने कानूनी हक के लिए नगर निकाय के चक्कर काट रही थी, लेकिन निगम की ओर से प्रक्रियाओं को पूरा करने में लगातार टालमटोल की जा रही थी। अदालत ने इस व्यवहार को न्यायिक प्रक्रिया का अपमान माना और अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने की चेतावनी दी।
सुनवाई के दौरान, उच्च न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि नगर निगम जैसे सार्वजनिक निकायों को यह नहीं समझना चाहिए कि वे कानून से ऊपर हैं। जब अदालत ने जेल भेजने की चेतावनी दी, तब जाकर ठाणे नगर निगम के रुख में नरमी आई। निगम के वकील ने अंततः अदालत को आश्वासन दिया कि आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 7 जुलाई तक संबंधित प्रमाणपत्र जारी कर दिए जाएंगे।
भारत में संपत्ति विवाद और प्रशासनिक देरी एक बड़ी समस्या रही है, जिसका सीधा असर प्रवासी भारतीय (NRI) समुदाय पर भी पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई भारतीय परिवार, जिनकी संपत्ति ठाणे, मुंबई या आसपास के क्षेत्रों में है, अक्सर इस तरह की नौकरशाही बाधाओं का सामना करते हैं। बंबई उच्च न्यायालय का यह सख्त रुख उन लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो वर्षों से सरकारी विभागों की फाइलों में दबे अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।
TDR और DRC जैसे वित्तीय साधन शहरी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे जमीन मालिकों को उनकी अधिग्रहित भूमि के बदले विकास अधिकार प्रदान करते हैं। यदि इन अधिकारों को समय पर नहीं दिया जाता, तो यह न केवल आर्थिक नुकसान है बल्कि नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन भी है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आदेश का पालन न होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी।
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