राजनीति
अयोध्या: राम मंदिर दान विवाद पर बढ़ी राजनीतिक रार, कांग्रेस नेताओं ने पुलिस पर लगाए नजरबंदी के आरोप
ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 08:31 am

अयोध्या में राम मंदिर दान में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश पुलिस पर अपने नेताओं को अवैध रूप से रोकने का आरोप लगाया है।
अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के साथ ही इससे जुड़े विवाद भी गहराते जा रहे हैं। हाल ही में राम मंदिर के चंदे में कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने भारतीय राजनीति में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है। इसी कड़ी में पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि अयोध्या पुलिस ने उनके नेताओं को मंदिर जाने से रोकने के लिए हिरासत में लिया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे केवल मंदिर के दर्शन करने और वहां की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने जा रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक दिया। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार पर सच छिपाने का आरोप लगाया है। विपक्षी दलों का तर्क है कि जिस मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है, उसके धन प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब मंदिर ट्रस्ट पर जमीन खरीद और दान की राशि के दुरुपयोग के आरोप लगे। हालांकि, मंदिर ट्रस्ट और सत्ताधारी दल ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद करार दिया है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कारणों से नेताओं की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए थे।
भारतीय समुदाय के लिए, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी भारतीयों (NRIs) के लिए, यह खबर काफी संवेदनशील है। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में रहने वाले हज़ारों हिंदुओं ने राम मंदिर निर्माण के लिए उदारतापूर्वक दान दिया है। ऐसे में वित्तीय गबन के आरोपों और उन पर हो रही राजनीति ने दानदाताओं के मन में विश्वास और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऑस्ट्रेलियाई हिंदू समुदाय के कई सदस्यों का मानना है कि आस्था के इस केंद्र को राजनीतिक खींचतान से दूर रखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि वैश्विक हिंदू पहचान का प्रतीक है। ऐसे में यदि दान में कोई विसंगति है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि भक्तों का भरोसा कायम रहे।
फिलहाल, उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी तेज है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे को आगामी चुनावों और जनसभाओं में उठाने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने किसी भी प्रकार की 'अवैध हिरासत' के दावों को नकारते हुए कहा है कि उनकी प्राथमिकता अयोध्या में शांति व्यवस्था बनाए रखना है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इन आरोपों की कोई विस्तृत जांच होती है या यह केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाएगा।
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