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कद छोटा, रफ्तार कम और अब बढ़ती उम्र: फिर भी लियोनेल मेस्सी कैसे बने हुए हैं फुटबॉल के बेताज बादशाह?

ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 04:31 am
कद छोटा, रफ्तार कम और अब बढ़ती उम्र: फिर भी लियोनेल मेस्सी कैसे बने हुए हैं फुटबॉल के बेताज बादशाह?

लियोनेल मेस्सी ने खेल के उन पारंपरिक पैमानों को चुनौती दी है जहाँ केवल गति और शारीरिक ताकत को ही महानता का आधार माना जाता था।

खेल की दुनिया में अक्सर यह माना जाता है कि एक महान एथलीट के लिए लंबी कद-काठी, जबरदस्त रफ्तार और शारीरिक शक्ति अनिवार्य है। लेकिन अर्जेंटीना के दिग्गज लियोनेल मेस्सी ने इन सभी धारणाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। 37 साल की उम्र में, जहाँ अधिकांश खिलाड़ी संन्यास ले लेते हैं या अपनी लय खो देते हैं, मेस्सी अभी भी मैदान पर जादू बिखेर रहे हैं। उनके खेल के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि फुटबॉल केवल पैरों से नहीं, बल्कि दिमाग से खेला जाता है। मेस्सी की सफलता का सबसे बड़ा राज उनकी 'स्कैनिंग' क्षमता है। मैच के दौरान आपने अक्सर गौर किया होगा कि मेस्सी मैदान पर टहलते हुए नजर आते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह उनकी सुस्ती नहीं, बल्कि उनकी रणनीति का हिस्सा है। वह लगातार अपनी गर्दन घुमाकर विपक्षी खिलाड़ियों की पोजीशन और मैदान के खाली स्थानों का जायजा लेते हैं। जब तक गेंद उनके पास पहुँचती है, उन्हें पहले से ही पता होता है कि अगला पास कहाँ देना है या गोल की ओर शॉट कैसे लेना है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय में फुटबॉल के प्रति बढ़ती दीवानगी के बीच मेस्सी एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के खेल प्रेमी, जो मेलबर्न से लेकर सिडनी तक ए-लीग और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को करीब से फॉलो करते हैं, मेस्सी को केवल एक खिलाड़ी नहीं बल्कि खेल की एक 'संस्था' मानते हैं। उनके खेल की सादगी और सटीकता उन्हें उन युवाओं के लिए आदर्श बनाती है जो शारीरिक रूप से बहुत शक्तिशाली नहीं हैं, लेकिन खेल की समझ रखते हैं। मेस्सी ने अपनी कम होती रफ्तार की भरपाई अपनी तकनीक से की है। जहाँ युवा खिलाड़ी गेंद के पीछे भागने में ऊर्जा खर्च करते हैं, वहीं मेस्सी गेंद को अपने पास बुलाते हैं। उनका 'लो सेंटर ऑफ ग्रेविटी' उन्हें तंग जगहों से निकलने में मदद करता है। 2022 विश्व कप की जीत ने यह साबित कर दिया कि अनुभव और सही समय पर सही निर्णय लेने की कला किसी भी एथलेटिक क्षमता से ऊपर है। अंततः, मेस्सी का खेल यह संदेश देता है कि खेल में दीर्घायु होने के लिए शरीर से ज्यादा मस्तिष्क का लचीलापन जरूरी है। इंटर मियामी के लिए खेलते हुए भी वे उसी उत्कृष्टता के साथ खेल रहे हैं, जो उनके बार्सिलोना के दिनों में दिखती थी। उनकी यह यात्रा दर्शाती है कि प्रतिभा किसी सांचे की मोहताज नहीं होती और महानता उम्र या कद के पैमानों से नहीं मापी जा सकती।
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