राजनीति
'छोटी मछलियों पर कार्रवाई, बड़े बचाए जा रहे': राम मंदिर मामले पर विपक्ष ने भाजपा को घेरा
ICN24 Newsroom 2 जुल॰ 2026, 09:31 pm

आरजेडी और कांग्रेस ने राम मंदिर चढ़ावा मामले में चयनात्मक कार्रवाई का आरोप लगाते हुए भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और उससे जुड़ी वित्तीय व्यवस्थाओं को लेकर भारत में एक बार फिर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। भारतीय राजनीति के प्रमुख विपक्षी दलों, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस ने केंद्र की भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि राम मंदिर चढ़ावे और अन्य वित्तीय मामलों की जांच में भेदभाव किया जा रहा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि प्रशासन केवल 'छोटी मछलियों' यानी निचले स्तर के कर्मचारियों या छोटे कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई कर रहा है, जबकि इस पूरे मामले के मुख्य सूत्रधारों और 'बड़े चेहरों' को बचाया जा रहा है।
राज्यसभा सांसद और आरजेडी के वरिष्ठ नेता मनोज झा ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब भी कोई भ्रष्टाचार या अनियमितता का मामला सामने आता है, तो सरकार की जांच एजेंसियां केवल उन लोगों को निशाना बनाती हैं जो रसूखदार नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर जैसे पवित्र और संवेदनशील मुद्दे पर भी पारदर्शिता की कमी है। मनोज झा के अनुसार, यह पैटर्न केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भाजपा की कार्यप्रणाली का हिस्सा बन चुका है जहां शीर्ष नेतृत्व को हमेशा जांच के दायरे से बाहर रखा जाता है।
वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने भी इस सुर में सुर मिलाते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया। राजपूत ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों भारतीयों की आस्था का केंद्र है और वहां होने वाली किसी भी प्रकार की वित्तीय अनहोनी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों बड़ी मछलियों को सुरक्षा कवच दिया जा रहा है? कांग्रेस का दावा है कि सरकार केवल जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए प्रतीकात्मक कार्रवाई कर रही है, जबकि असली गड़बड़ी करने वाले खुलेआम घूम रहे हैं।
राजनीतिक चर्चाओं के बीच, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा के कार्यालय पर कथित रूप से अंडे फेंके जाने की घटना ने भी तूल पकड़ लिया है। विपक्ष ने इसे राजनीतिक असहिष्णुता का उदाहरण बताते हुए कहा कि जो लोग सत्ता के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है। मनोज झा ने इस घटना की भी निंदा की और कहा कि यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में लगभग 9.7 लाख लोग भारतीय मूल के हैं, जिनमें से एक बड़ा वर्ग अयोध्या और राम मंदिर से जुड़ी गतिविधियों को गहराई से देखता है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में राम मंदिर के उद्घाटन के समय भव्य कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। ऐसे में मंदिर प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवाल डायस्पोरा के बीच भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। प्रवासी भारतीय चाहते हैं कि मंदिर से जुड़ी हर प्रक्रिया पारदर्शी हो ताकि उनकी आस्था पर किसी तरह का कोई सवाल न उठे।
फिलहाल, भाजपा ने इन आरोपों को निराधार बताया है। पार्टी का कहना है कि जांच एजेंसियां कानून के तहत अपना काम कर रही हैं और विपक्ष केवल राजनीति चमकाने के लिए इस तरह के आरोप लगा रहा है। हालांकि, 'छोटी मछली बनाम बड़ी मछली' की इस बहस ने आगामी चुनावों से पहले भारत के राजनीतिक वातावरण को और अधिक गरमा दिया है।
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