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'होमबाउंड' के सिनेमैटोग्राफर प्रतीक शाह ने मांगी माफी, 20 से अधिक महिलाओं ने लगाया था यौन दुर्व्यवहार का आरोप

ICN24 Newsroom 2 जुल॰ 2026, 10:31 pm
'होमबाउंड' के सिनेमैटोग्राफर प्रतीक शाह ने मांगी माफी, 20 से अधिक महिलाओं ने लगाया था यौन दुर्व्यवहार का आरोप

सिनेमैटोग्राफर प्रतीक शाह ने यौन दुर्व्यवहार और हेरफेर के आरोपों के एक साल बाद माफी मांगते हुए 'गहरा खेद' व्यक्त किया है।

भारतीय फिल्म उद्योग के जाने-माने सिनेमैटोग्राफर प्रतीक शाह, जिन्हें फिल्म 'होमबाउंड' के लिए पहचाना जाता है, ने अपने ऊपर लगे यौन दुर्व्यवहार के गंभीर आरोपों के एक साल बाद सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। शाह ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक बयान जारी कर कहा है कि वह अपने पिछले आचरण के लिए "गहरा खेद" महसूस कर रहे हैं। यह मामला पिछले साल तब तूल पकड़ा था जब फिल्म निर्माता अभिनव सिंह ने शाह परManipulative (हेरफेर करने वाला) होने का आरोप लगाया था, जिसके बाद लगभग 20 महिलाओं ने उनके खिलाफ अपने अनुभव साझा किए थे। प्रतीक शाह के खिलाफ लगे आरोपों ने फिल्म उद्योग में खलबली मचा दी थी। अभिनव सिंह के शुरुआती दावों के बाद, कई महिलाओं ने सामने आकर शाह पर पेशेवर सीमाओं को लांघने और अनुचित व्यवहार करने के आरोप लगाए थे। इन आरोपों में मुख्य रूप से यह कहा गया था कि शाह ने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल महिलाओं को मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रभावित करने के लिए किया। एक साल की लंबी चुप्पी के बाद, शाह का यह माफीनामा अब सामने आया है, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया है कि उनके कार्यों से दूसरों को पीड़ा हुई है। अपने बयान में शाह ने लिखा कि उन्होंने पिछले एक साल में आत्मचिंतन किया है और वे अपनी गलतियों की पूरी जिम्मेदारी लेते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे उन लोगों से माफी मांगना चाहते हैं जिन्हें उनके व्यवहार के कारण किसी भी प्रकार का कष्ट उठाना पड़ा। हालांकि, सोशल मीडिया पर इस माफीनामे को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। जहां कुछ लोग इसे सुधार की दिशा में एक कदम मान रहे हैं, वहीं कई अन्य लोग इसे बहुत देर से उठाया गया कदम और महज एक 'डैमेज कंट्रोल' की कवायद बता रहे हैं। यह घटनाक्रम भारतीय सिनेमा और रचनात्मक उद्योगों में कार्यस्थल की सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर चल रही वैश्विक बहस का हिस्सा है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहां भी भारतीय मूल के कलाकार और तकनीशियन सक्रिय हैं। ऑस्ट्रेलिया में 'मी टू' (MeToo) आंदोलन और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ कड़े कानूनों के बीच, इस तरह की खबरें समुदाय को जागरूक करती हैं कि पेशेवर जगत में व्यवहार की मर्यादा क्या होनी चाहिए। सिनेमा जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि केवल माफी मांग लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उद्योग में ऐसे संरचनात्मक बदलावों की आवश्यकता है जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। प्रतीक शाह का मामला यह दर्शाता है कि अब सोशल मीडिया के दौर में प्रभावशाली पदों पर बैठे लोगों के लिए अपने कार्यों की जवाबदेही से बचना मुश्किल होता जा रहा है।
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