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भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: आईटी शेयरों के दबाव में सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा फिसला

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 02:56 pm
भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: आईटी शेयरों के दबाव में सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा फिसला

पांच दिनों की लगातार बढ़त के बाद भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। आईटी शेयरों में भारी बिकवाली के कारण सेंसेक्स 607 अंक लुढ़ककर 76,802 पर बंद हुआ।

भारतीय शेयर बाजार में पिछले पांच कारोबारी सत्रों से जारी रिकॉर्ड बढ़त पर शुक्रवार को विराम लग गया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन में निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली और आईटी क्षेत्र के दिग्गजों में आई गिरावट के चलते बाजार लाल निशान पर बंद हुआ। 30 शेयरों वाला बीएसई (BSE) सेंसेक्स 607.08 अंक यानी 0.78 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,802.90 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 154.90 अंक यानी 0.64 प्रतिशत फिसलकर 24,013.10 पर बंद हुआ। बाजार में इस गिरावट का मुख्य कारण आईटी इंडेक्स में आई कमजोरी को माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख के संकेतों ने तकनीकी शेयरों पर दबाव बनाया है। चूंकि भारतीय आईटी कंपनियां अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों से प्राप्त करती हैं, इसलिए वहां की आर्थिक गतिविधियों का सीधा असर इन कंपनियों के मूल्यांकन पर पड़ता है। टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का माहौल रहा, जिससे पूरे सूचकांक का सेंटीमेंट बिगड़ गया। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए, जो नियमित रूप से भारत में निवेश करते हैं या प्रेषण (remittance) भेजते हैं, बाजार की यह अस्थिरता महत्वपूर्ण है। सिडनी और मेलबर्न में स्थित कई प्रवासी भारतीय (NRIs) भारत के इक्विटी मार्केट और रियल एस्टेट में सक्रिय निवेश करते हैं। बाजार में इस तरह की गिरावट अक्सर निवेश के नए अवसर पैदा करती है, लेकिन साथ ही यह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता की ओर भी इशारा करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और भारतीय रुपये के बीच के उतार-चढ़ाव के साथ-साथ शेयर बाजार की यह चाल निवेशकों की भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर सकती है। सेक्टरों की बात करें तो आईटी के अलावा बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के शेयरों में भी मामूली गिरावट देखी गई। हालांकि, कुछ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने निचले स्तरों पर खरीदारी के चलते बाजार को संभालने की कोशिश की, लेकिन बड़ी कंपनियों में बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि निफ्टी अपने मनोवैज्ञानिक स्तर 24,000 के करीब संघर्ष करता नजर आया। विशेषज्ञों के अनुसार, अगले सप्ताह बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की खरीदारी पर निर्भर करेगी। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि पांच दिनों की लगातार रैली के बाद इस तरह का 'करेक्शन' होना सामान्य है। कई निवेशकों ने ऊपरी स्तरों पर मुनाफा बुक करना बेहतर समझा। ऑस्ट्रेलिया-भारत व्यापार गलियारे में काम करने वाले पेशेवरों के लिए, यह गिरावट भारतीय तकनीकी क्षेत्र की मजबूती और चुनौतियों को समझने का एक संकेत है। फिलहाल, बाजार की नजर आने वाले तिमाही नतीजों और वैश्विक महंगाई दर के आंकड़ों पर टिकी है।
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