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रिलायंस का कच्छ प्रोजेक्ट पैदा करेगा 40 अरब यूनिट ग्रीन पावर, भारत की 3% बिजली की जरूरत होगी पूरी
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 12:48 am
रिलायंस इंडस्ट्रीज गुजरात के कच्छ में दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी हब बना रही है, जिससे भारत की कुल बिजली मांग का 3% हिस्सा पूरा होगा।
भारत के औद्योगिक परिदृश्य में एक युगांतरकारी बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। दिग्गज कारोबारी मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) गुजरात के कच्छ क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े एकीकृत अक्षय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) परिसरों में से एक का निर्माण कर रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लक्ष्य सालाना 40 अरब यूनिट से अधिक हरित बिजली पैदा करना है। यह उत्पादन इतना विशाल है कि इससे भारत की वर्तमान बिजली मांग का लगभग 3 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी हब से पूरा किया जा सकेगा।
करीब 5.5 लाख एकड़ में फैला यह प्रोजेक्ट न केवल रिलायंस के लिए बल्कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए भी एक मील का पत्थर साबित होगा। कच्छ के रेगिस्तानी इलाके में स्थित यह हब कंपनी की सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार किया गया है। रिलायंस का यह कदम भारत सरकार के 2070 तक 'नेट ज़ीरो' उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ी छलांग है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की स्थिति को मजबूत करेगी। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया खुद को एक 'रिन्यूएबल एनर्जी सुपरपावर' के रूप में स्थापित कर रहा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग और 'इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड ट्रेड एग्रीमेंट' (ECTA) के तहत, इस तरह के बड़े निवेश दोनों देशों के बीच तकनीकी आदान-प्रदान और कौशल विकास के नए रास्ते खोल सकते हैं।
रिलायंस का यह ग्रीन एनर्जी हब केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। यह एक संपूर्ण ईकोसिस्टम है जिसमें फोटोवोल्टिक पैनलों का निर्माण, उन्नत रसायन विज्ञान वाली बैटरी का उत्पादन और हरित हाइड्रोजन के लिए इलेक्ट्रोलाइजर की सुविधा शामिल होगी। 5.5 लाख एकड़ का यह विशाल क्षेत्र आकार में कई छोटे देशों से भी बड़ा है, जो रिलायंस की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसके तहत वह अपने पारंपरिक 'ऑयल-टू-केमिकल्स' व्यवसाय से हटकर एक हरित और स्वच्छ भविष्य की ओर बढ़ रही है।
इस परियोजना का प्रभाव न केवल पर्यावरण पर पड़ेगा, बल्कि यह हजारों की संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी। प्रवासी भारतीय, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में काम कर रहे पेशेवर, इस विकास को भारत में निवेश और करियर के उभरते अवसरों के रूप में देख रहे हैं। भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए, यह 3 प्रतिशत का योगदान देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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