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रिलायंस का कच्छ प्रोजेक्ट: 40 अरब यूनिट ग्रीन पावर से पूरी होगी भारत की 3% बिजली की मांग
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 12:51 am

रिलायंस इंडस्ट्रीज गुजरात के कच्छ में दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी हब बना रही है, जो भारत की कुल बिजली मांग का 3% हिस्सा पूरा करेगा।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) भारत के ऊर्जा परिदृश्य को बदलने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठा रही है। कंपनी गुजरात के कच्छ जिले में दुनिया के सबसे बड़े एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लक्ष्य सालाना 40 अरब यूनिट से अधिक हरित बिजली पैदा करना है, जो भारत की वर्तमान कुल बिजली मांग का लगभग 3 प्रतिशत हिस्सा होगा।
5.5 लाख एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैली यह परियोजना न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह रिलायंस के 2035 तक 'नेट-जीरो' (शुद्ध-शून्य उत्सर्जन) बनने के लक्ष्य की ओर एक बड़ा कदम है। इस हब में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अत्याधुनिक बैटरी स्टोरेज समाधानों का एक अनूठा संगम देखने को मिलेगा। कंपनी ने संकेत दिया है कि इस विशाल बुनियादी ढांचे का उपयोग उसके सौर पैनल निर्माण, ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और अगली पीढ़ी की बैटरी प्रौद्योगिकियों के समर्थन के लिए किया जाएगा।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों के संदर्भ में, रिलायंस की यह पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया, जो वर्तमान में लिथियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के मामले में भारत का प्रमुख साझेदार बन रहा है, इस तरह की परियोजनाओं के लिए कच्चे माल और तकनीकी सहयोग का एक बड़ा स्रोत हो सकता है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर भारत की बढ़ती औद्योगिक शक्ति और वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्छ में रिलायंस की यह परियोजना वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की स्थिति को मजबूत करेगी। 40 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन न केवल उद्योगों के लिए कार्बन-मुक्त ऊर्जा सुनिश्चित करेगा, बल्कि यह घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए भी भविष्य में ग्रिड की स्थिरता और वहनीयता को बढ़ावा देगा। यह परियोजना ग्रीन हाइड्रोजन की लागत को कम करने में भी मदद करेगी, जिससे भारत निर्यात के मोर्चे पर एक वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर सकता है।
रिलायंस का यह विजन केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। कंपनी एक पूर्ण 'सर्कुलर इकोनॉमी' मॉडल पर काम कर रही है, जहां कच्चे माल से लेकर अंतिम ऊर्जा उत्पाद तक सब कुछ एकीकृत होगा। कच्छ का यह हब भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों (500 गीगावाट की क्षमता 2030 तक) को प्राप्त करने की दिशा में सबसे बड़ा व्यक्तिगत योगदानकर्ता बनने की राह पर है।
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