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जियो प्लेटफॉर्म्स लाएगा देश का सबसे बड़ा आईपीओ: सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर जमा, मेटा और गूगल नहीं बेचेंगे हिस्सा
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 05:09 am

रिलायंस जियो ने सेबी के पास आईपीओ के लिए ड्राफ्ट पेपर जमा कर दिए हैं। इस मेगा इश्यू के जरिए कंपनी कर्ज चुकाने और विस्तार पर ध्यान देगी, जबकि मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बरकरार रखेंगे।
भारतीय दूरसंचार और डिजिटल सेवा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी, रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) के लिए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा कर दिया है। यह आईपीओ भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम होने की संभावना है। इस खबर के सामने आते ही वैश्विक निवेशकों और विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय मूल के उन निवेशकों के बीच हलचल बढ़ गई है, जो भारतीय शेयर बाजार में अपनी पैठ बनाना चाहते हैं।
सेबी को सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार, यह आईपीओ पूरी तरह से 'फ्रेश इश्यू' (Fresh Issue) होगा। इसका अर्थ यह है कि कंपनी बाजार में 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी। सबसे महत्वपूर्ण और सकारात्मक बात यह है कि रिलायंस जियो के मौजूदा बड़े निवेशक, जिनमें टेक दिग्गज मेटा (फेसबुक) और गूगल शामिल हैं, अपनी हिस्सेदारी कम नहीं कर रहे हैं। आम तौर पर बड़े आईपीओ में मौजूदा निवेशक 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचकर मुनाफावसूली करते हैं, लेकिन जियो के मामले में निवेशकों का यह भरोसा दर्शाता है कि उन्हें कंपनी के भविष्य और विकास की संभावनाओं पर अटूट विश्वास है।
कंपनी ने इस आईपीओ से प्राप्त होने वाली पूंजी का उपयोग मुख्य रूप से अपने ऋण बोझ को कम करने के लिए करने की योजना बनाई है। ड्राफ्ट पेपर के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ से मिलने वाले फंड में से लगभग 27,500 करोड़ रुपये का इस्तेमाल अपना कर्ज चुकाने के लिए करेगी। पूंजी संरचना को मजबूत करने के इस कदम से कंपनी की वित्तीय सेहत में सुधार होगा और भविष्य में बुनियादी ढांचे के विस्तार, विशेष रूप से 5G सेवाओं के देशव्यापी प्रसार में मदद मिलेगी।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह निवेश का एक सुनहरा अवसर हो सकता है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में स्थित वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि रिलायंस जियो का आईपीओ न केवल भारतीय बाजार की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय टेक पारिस्थितिकी तंत्र की बढ़ती साख का भी प्रतीक है। कई एनआरआई (NRI) निवेशक अक्सर रिलायंस जैसी स्थिर और बड़ी कंपनियों के जरिए भारतीय बाजार में प्रवेश करना पसंद करते हैं। जियो का डिजिटल प्रभुत्व और ई-कॉमर्स व मनोरंजन क्षेत्र में इसका विस्तार इसे एक आकर्षक पोर्टफोलियो विकल्प बनाता है।
बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि इस आईपीओ का आकार भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पिछले रिकॉर्ड को भी तोड़ सकता है। जियो ने जिस तरह से डेटा क्रांति के जरिए भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की शक्ल बदली है, उसे देखते हुए बाजार में इसकी भारी मांग रहने की उम्मीद है। अब सभी की निगाहें सेबी की मंजूरी और आईपीओ की आधिकारिक तारीखों पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि रिटेल निवेशकों और संस्थागत निवेशकों के लिए मूल्य का दायरा क्या तय किया जाता है।
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