राजनीति
झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज: प्रकाश राज की 'चुप्पी' और पोस्ट पर भड़के सोशल मीडिया यूजर्स, चहुंओर आलोचना
ICN24 Newsroom 11 अग॰ 2026, 09:37 pm
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झारखंड में छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई पर अभिनेता प्रकाश राज के सोशल मीडिया पोस्ट ने विवाद खड़ा कर दिया है। यूजर्स ने उन पर चयनात्मक सक्रियता का आरोप लगाया है।
झारखंड में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है। इस घटनाक्रम में अभिनेता और मुखर सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। अक्सर 'जस्ट आस्किंग' (#JustAsking) हैशटैग के साथ सरकार से सवाल पूछने वाले प्रकाश राज पर इस बार नेटिज़न्स ने 'चयनात्मक चुप्पी' और 'दोहरे मापदंड' अपनाने का आरोप लगाया है।
झारखंड की राजधानी रांची में हाल ही में छात्र विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में विसंगतियों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। स्थिति तब गंभीर हो गई जब रात के अंधेरे में पुलिस ने छात्रों पर बल प्रयोग किया और लाठीचार्ज किया। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद व्यापक जनाक्रोश देखा गया। हालांकि, प्रकाश राज, जो आमतौर पर भाजपा शासित राज्यों में ऐसी घटनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं, इस मामले में घंटों तक चुप रहे। झारखंड में वर्तमान में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के गठबंधन की सरकार है।
जब प्रकाश राज ने अंततः इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी, तो सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को उनकी प्रतिक्रिया रास नहीं आई। यूजर्स ने अभिनेता को घेरते हुए सवाल किया कि वे गैर-भाजपा शासित राज्यों में होने वाले पुलिसिया दमन पर इतने उदार क्यों हो जाते हैं। कई यूजर्स ने उनके पुराने ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट साझा किए, जिनमें उन्होंने अन्य राज्यों में हुई समान घटनाओं की कड़ी निंदा की थी। आलोचकों का तर्क है कि एक कार्यकर्ता के रूप में उनकी नैतिकता दलगत राजनीति से ऊपर होनी चाहिए।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रवासी भारतीयों के बीच भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और नागरिक अधिकारों को लेकर गहरी रुचि रहती है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई छात्र और पेशेवर अक्सर भारत में शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं। प्रकाश राज जैसे प्रभावशाली व्यक्तित्व का इस तरह विवादों में आना प्रवासियों के बीच सेलिब्रिटी सक्रियता की विश्वसनीयता पर बहस छेड़ देता है।
सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, "जब सत्ता पक्ष आपकी पसंद का हो, तो क्या 'सवाल पूछना' बंद हो जाता है?" वहीं दूसरे यूजर ने टिप्पणी की कि छात्रों के दर्द का कोई राजनीतिक रंग नहीं होना चाहिए। प्रकाश राज को घेरने वालों का मुख्य तर्क यह है कि लाठी की चोट उतनी ही दर्दनाक होती है, चाहे वह किसी भी सरकार के आदेश पर चलाई गई हो। समाचार लिखे जाने तक, अभिनेता ने इन तीखी प्रतिक्रियाओं पर कोई नई सफाई पेश नहीं की है। झारखंड की यह घटना अब केवल एक प्रशासनिक मुद्दा न रहकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक निष्पक्षता की कसौटी बन गई है।
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