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8वां वेतन आयोग: क्या मूल वेतन में जुड़ेगा महंगाई भत्ता? सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में भारी बढ़ोतरी की संभावना
ICN24 Newsroom 11 अग॰ 2026, 03:37 pm
8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों में उम्मीदें बढ़ गई हैं। चर्चा है कि महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी में मर्ज किया जा सकता है।
भारत में केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) इस समय चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है। जैसे-जैसे 2026 का समय नजदीक आ रहा है, सरकारी गलियारों और कर्मचारी यूनियनों में नए वेतन ढांचे को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकार महंगाई भत्ते (DA) को मूल वेतन (Basic Salary) में विलय करने के प्रस्ताव को मंजूरी देगी? यदि ऐसा होता है, तो कर्मचारियों के वेतन और सेवानिवृत्त कर्मियों की पेंशन में एक बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
आमतौर पर भारत सरकार हर 10 साल में एक नए वेतन आयोग का गठन करती है ताकि बढ़ती महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप सरकारी कर्मचारियों के वेतन की समीक्षा की जा सके। वर्तमान में 7वां वेतन आयोग लागू है, जिसकी सिफारिशें 2016 में प्रभावी हुई थीं। परंपरा के अनुसार, 8वें वेतन आयोग का गठन जल्द ही होना चाहिए ताकि इसकी सिफारिशें जनवरी 2026 तक लागू की जा सकें। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है, लेकिन कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
सैलरी में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा आधार 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) और महंगाई भत्ते का मर्जर माना जा रहा है। वर्तमान में फिटमेंट फैक्टर 2.57 गुना है। कर्मचारी यूनियनें इसे बढ़ाकर 3.68 गुना करने की मांग कर रही हैं। यदि सरकार इस मांग को आंशिक रूप से भी मानती है, तो न्यूनतम मूल वेतन जो अभी 18,000 रुपये है, वह बढ़कर 26,000 रुपये या उससे अधिक हो सकता है। इसके अलावा, जब महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत की सीमा को पार कर जाता है, तो ऐतिहासिक रूप से इसे मूल वेतन में जोड़ने की मांग उठती रही है, जिससे भत्ते और अन्य लाभों की गणना नए आधार पर होती है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर काफी महत्वपूर्ण है। प्रवासी भारतीयों (NRIs) का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है जिनके माता-पिता या परिवार के सदस्य भारत में सरकारी सेवाओं से सेवानिवृत्त हुए हैं। पेंशन में होने वाली किसी भी तरह की बढ़ोतरी न केवल उन परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करती है, बल्कि यह प्रवासियों द्वारा भारत भेजे जाने वाले धन (Remittance) और निवेश की योजनाओं को भी प्रभावित करती है। भारत में बढ़ती क्रय शक्ति सीधे तौर पर प्रवासी परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने से न केवल कर्मचारियों की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ेगी, बल्कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में खपत को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, सरकार के लिए चुनौती राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित रखने की होगी। वेतन और पेंशन का बोझ सरकारी खजाने पर बड़ा असर डालता है। फिलहाल, देशभर के एक करोड़ से अधिक कर्मचारी और पेंशनभोगी सरकार के अगले कदम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आने वाले बजट सत्रों में इस दिशा में किसी बड़ी घोषणा की उम्मीद जताई जा रही है।
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