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0 पर आउट होकर भी बना दिया 187 रन का रिकॉर्ड! जब विरोधी कप्तान की इस एक भूल से गेंदबाज बहाने लगे खून के आंसू

ICN24 Newsroom 11 अग॰ 2026, 07:39 pm
0 पर आउट होकर भी बना दिया 187 रन का रिकॉर्ड! जब विरोधी कप्तान की इस एक भूल से गेंदबाज बहाने लगे खून के आंसू

क्रिकेट के मैदान पर एक खिलाड़ी शून्य पर आउट हुआ, लेकिन फिर भी उसके खाते में 187 रन जुड़ गए। जानिए इतिहास की इस सबसे विचित्र घटना के पीछे का सच।

क्रिकेट के खेल में रिकॉर्ड्स का बनना और टूटना एक आम बात है, लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसी घटनाएं घटती हैं जो तर्क और विज्ञान की सीमाओं से परे नजर आती हैं। ऐसा ही एक किस्सा क्रिकेट जगत में अक्सर चर्चा का विषय बनता है, जहां एक खिलाड़ी अपने डेब्यू मैच में शून्य (डक) पर आउट होने के बावजूद 187 रनों का 'अघोषित' रिकॉर्ड बना बैठा। यह कहानी किसी आधुनिक टी-20 मैच की नहीं, बल्कि क्रिकेट के उस दौर की है जब नियम आज जितने सख्त नहीं थे और मैदानों की बनावट भी अलग हुआ करती थी। इस घटना का केंद्र एक ऐसा मैच था जहां एक बल्लेबाज पहली ही गेंद पर आउट हो गया। अमूमन किसी भी खिलाड़ी के लिए शून्य पर पवेलियन लौटना एक बुरे सपने जैसा होता है, खासकर तब जब वह अपना पहला मैच खेल रहा हो। लेकिन इस मैच में कहानी ने तब मोड़ लिया जब क्षेत्ररक्षण करने वाली टीम (फिल्डिंग साइड) और कप्तान ने एक ऐसी तकनीकी गलती कर दी, जिसने गेंदबाज के पसीने छुड़ा दिए। क्रिकेट के जानकारों के अनुसार, जब बल्लेबाज ने शॉट खेला, तो गेंद सीमा रेखा के पास एक ऊंचे पेड़ या झाड़ियों में जाकर फंस गई। नियमों के अनुसार, जब तक गेंद फील्डर के हाथ में नहीं आती या उसे 'डेड बॉल' घोषित नहीं किया जाता, तब तक बल्लेबाज रन दौड़ सकते थे। विरोधी कप्तान ने गेंद को ढूंढने में काफी समय बर्बाद कर दिया और अंपायर से 'लॉस्ट बॉल' की अपील करने में देरी की। इसी बीच, बल्लेबाजों ने विकेटों के बीच दौड़ना जारी रखा। सूत्रों और लोककथाओं के अनुसार, उन्होंने इतने चक्कर लगाए कि स्कोरबोर्ड पर रन संख्या 180 के पार पहुंच गई। हालांकि, आधुनिक आंकड़ों में इस पर मतभेद हो सकता है, लेकिन यह कहानी खेल के प्रति दीवानगी और नियमों की पेचीदगी को दर्शाती है। ऑस्ट्रेलियाई भारतीय समुदाय के लिए यह किस्सा विशेष महत्व रखता है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के घरेलू क्रिकेट इतिहास में भी ऐसी ही एक घटना का जिक्र मिलता है। 1894 में पर्थ के एक मैदान पर विक्टोरिया और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के बीच मैच के दौरान गेंद एक 'जर्राह' के पेड़ में फंस गई थी। उस समय बल्लेबाजों ने तब तक दौड़ना जारी रखा जब तक कि पेड़ को काटने के लिए कुल्हाड़ी नहीं मंगवाई गई। हालांकि उस मैच में 286 रन बनने का दावा किया जाता है, लेकिन 187 रनों वाली यह घटना भी क्रिकेट की उन 'अर्बन लेजेंड्स' में शुमार है जो आज भी क्लब क्रिकेट की चर्चाओं में जीवित है। इस घटना ने क्रिकेट के नियमों में बड़े बदलावों की नींव रखी। आज के समय में यदि गेंद खो जाती है या किसी बाधा में फंसती है, तो अंपायर तुरंत 'डेड बॉल' का इशारा करते हैं और अधिकतम रन सीमित कर दिए जाते हैं। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि क्रिकेट केवल कौशल का खेल नहीं है, बल्कि यह भाग्य और अप्रत्याशित परिस्थितियों का एक अनूठा संगम है। डेब्यू पर शून्य पर आउट होने वाले उस खिलाड़ी का नाम भले ही इतिहास के पन्नों में धुंधला हो गया हो, लेकिन उस दिन की अफरा-तफरी आज भी क्रिकेट प्रेमियों के चेहरे पर मुस्कान ला देती है।
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