राजनीति
दिल्ली लक्ष्मी योजना: महिलाओं के लिए आर्थिक सुरक्षा या चुनावी रणनीति? पूरी जानकारी
ICN24 Newsroom 11 अग॰ 2026, 08:37 pm

दिल्ली सरकार की नई लक्ष्मी योजना के तहत पात्र महिलाओं को ₹2,500 मासिक मिलेंगे। जानिए कैसे यह योजना डिजिटल मुद्रा और बचत को बढ़ावा देगी।
दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 'दिल्ली लक्ष्मी योजना' (DLY) के कार्यान्वयन की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य कम आय वाले परिवारों की महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना है, ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ भविष्य के लिए बचत भी कर सकें।
इस योजना के तहत, उन परिवारों की महिलाएं पात्र होंगी जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है। सरकार ने इस सहायता राशि को 2,500 रुपये प्रति माह निर्धारित किया है। हालांकि, इस योजना की सबसे विशिष्ट विशेषता इसका वितरण मॉडल है। लाभार्थी इस राशि को दो तरीकों से प्राप्त कर सकते हैं: या तो पूरी राशि आवर्ती जमा (RD) या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) खाते में जमा की जा सकती है, या फिर इसे विभाजित किया जा सकता है। विभाजन के विकल्प में ₹1,500 को RD/FD खाते में और शेष ₹1,000 को सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के रूप में डिजिटल वॉलेट में दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि CBDC का समावेश भारत में डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह न केवल महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ता है, बल्कि उन्हें आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा भी बनाता है। नामित बैंकों में इसके लिए विशेष खाते खोले जाएंगे, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाएगी।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई प्रवासी अभी भी दिल्ली में अपने परिवारों से जुड़े हुए हैं और भारत के शहरी शासन मॉडल पर कड़ी नजर रखते हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे दिल्ली मूल के भारतीयों के बीच इस बात को लेकर चर्चा है कि क्या यह योजना वास्तव में जमीनी स्तर पर बदलाव लाएगी या यह आगामी चुनावों को देखते हुए एक लोकलुभावन घोषणा मात्र है।
राजनीतिक गलियारों में इस योजना को लेकर बहस छिड़ गई है। जहां सत्ता पक्ष इसे 'क्रांतिकारी कदम' बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे 'रेवड़ी संस्कृति' या चुनावी फायदे के लिए सरकारी खजाने पर बोझ डालने वाला कदम करार दे रहा है। आलोचकों का तर्क है कि दीर्घकालिक रोजगार सृजन के बजाय सीधे नकद हस्तांतरण अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके बावजूद, दिल्ली सरकार का दावा है कि यह योजना महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक स्वायत्तता प्रदान करेगी।
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