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प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा: समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा मार्ग और चीन की चुनौतियों पर टिकी दुनिया की निगाहें

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 03:52 am
प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा: समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा मार्ग और चीन की चुनौतियों पर टिकी दुनिया की निगाहें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी सेशेल्स यात्रा हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक पकड़ मजबूत करने और चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

नई दिल्ली और विक्टोरिया के बीच कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी सेशेल्स यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यह दौरा केवल एक द्विपक्षीय मुलाकात नहीं है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की 'सगर' (SAGAR - Security and Growth for All in the Region) पहल को धरातल पर उतारने का एक बड़ा प्रयास है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हिंद महासागर का महत्व अपने चरम पर है और समुद्री सुरक्षा एक गंभीर चिंता बनकर उभरी है। सेशेल्स, जो हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित एक छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीप राष्ट्र है, भारत के लिए समुद्री सुरक्षा का एक प्रमुख स्तंभ है। जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री की इस यात्रा का मुख्य एजेंडा समुद्री सुरक्षा सहयोग को और अधिक गहरा करना होगा। इसमें तटीय निगरानी प्रणाली (Coastal Surveillance Radar System) और सूचना साझाकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हो सकते हैं। भारत की योजना अपने इस पड़ोसी मित्र देश के साथ मिलकर समुद्री डकैती और अवैध तस्करी को रोकने के लिए एक मजबूत नेटवर्क तैयार करने की है। इस यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पहलू ऊर्जा सुरक्षा है। जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए खतरा पैदा कर दिया है। भारत के लिए अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए समुद्री रास्तों का सुरक्षित होना अनिवार्य है। सेशेल्स के साथ मजबूत संबंध भारत को उन प्रमुख समुद्री मार्गों पर नजर रखने और उन्हें सुरक्षित बनाने में मदद करेंगे, जहाँ से भारत का अधिकांश व्यापार और ईंधन गुजरता है। यह न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे दक्षिण एशिया और यहां तक कि ऑस्ट्रेलिया के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता में गहरा विश्वास रखता है। चीन की इस क्षेत्र में बढ़ती मौजूदगी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है। चीन अपनी 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति के तहत हिंद महासागर में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में भारत का सेशेल्स के साथ सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में समझौता करना चीन की विस्तारवादी नीतियों को संतुलित करने का एक ठोस जवाब माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अपने प्रभाव क्षेत्र में सक्रियता बढ़ानी होगी ताकि क्षेत्र में शक्ति का संतुलन बना रहे। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह कूटनीतिक हलचल काफी मायने रखती है। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही 'क्वाड' (Quad) के सदस्य हैं और एक 'मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत' के समर्थक हैं। जब भारत सेशेल्स जैसे देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करता है, तो यह ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को भी बल देता है। सिडनी और मेलबर्न में बसे प्रवासी भारतीय इस बात को गौरव के साथ देखते हैं कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि एक वैश्विक समुद्री रक्षक के रूप में उभर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से रक्षा, व्यापार और संस्कृति के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित होने की उम्मीद है।
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