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बांग्लादेश में हिंदू समुदाय का व्यापक प्रदर्शन, भगवान राम की तस्वीर के कथित अपमान पर भारी रोष
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 09:40 pm
बांग्लादेश में भगवान राम की तस्वीर के कथित अपमान के बाद हिंदू समुदाय सड़कों पर है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से सुरक्षा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में हिंदू समुदाय के सदस्यों ने भगवान राम की एक तस्वीर के कथित अपमान के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ढाका सहित कई प्रमुख शहरों में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और धार्मिक संगठनों ने सड़कों पर उतरकर इस घटना की कड़ी निंदा की और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।
हालिया घटनाक्रम ने देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन की निष्क्रियता के कारण ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं। मानव श्रृंखला बनाकर और रैलियां निकालकर हिंदू नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे नागरिक के रूप में अपने अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और धार्मिक सद्भाव को बिगाड़ने वाली ताकतों का डटकर मुकाबला करेंगे।
यह तनावपूर्ण स्थिति ऐसे समय में आई है जब बांग्लादेश एक राजनीतिक संक्रमण काल से गुजर रहा है। ढाका में आयोजित एक विरोध सभा में हिंदू समुदाय के नेताओं ने कहा, "हम इस देश के समान नागरिक हैं और हमें अपनी आस्था के साथ सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार है। बार-बार धार्मिक प्रतीकों को निशाना बनाना न केवल हमारी भावनाओं को आहत करता है, बल्कि देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को भी चुनौती देता है।"
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह घटनाक्रम चिंता का विषय बना हुआ है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय सोशल मीडिया और सामुदायिक मंचों के माध्यम से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों की रक्षा की अपील कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया में धार्मिक असहिष्णुता की ऐसी घटनाएं वैश्विक स्तर पर भारतीय डायस्पोरा को प्रभावित करती हैं और ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले दक्षिण एशियाई समुदायों के बीच भी इसकी चर्चा तेज है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल, स्थानीय प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन समुदाय का गुस्सा कम होता नहीं दिख रहा है। अल्पसंख्यकों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से भी इस मामले में संज्ञान लेने का आग्रह किया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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