ऑस्ट्रेलिया
फिजी समझौते के बाद सोलोमन द्वीप के लिए रवाना हुए पीएम अल्बनीज; क्षेत्रीय संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
ICN24 Newsroom 7 जुल॰ 2026, 05:31 am
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज फिजी के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौते के बाद सोलोमन द्वीप के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने के लिए रवाना हो गए हैं।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने प्रशांत क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ाते हुए फिजी से सीधे सोलोमन द्वीप की ओर रुख किया है। फिजी के साथ एक ऐतिहासिक सुरक्षा और आर्थिक समझौते पर मुहर लगाने के बाद, पीएम अल्बनीज अब सोलोमन द्वीप के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब ऑस्ट्रेलिया अपनी 'पैसिफिक फर्स्ट' (प्रशांत प्रथम) नीति के माध्यम से क्षेत्रीय प्रभाव को पुनः प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है।
फिजी में हुई सफल चर्चाओं के बाद, जिसे ऑस्ट्रेलियाई कूटनीति के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है, पीएम अल्बनीज का सोलोमन द्वीप जाना इस बात का संकेत है कि ऑस्ट्रेलिया अपने पड़ोसियों के साथ रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करना चाहता है। सोलोमन द्वीप में नेतृत्व परिवर्तन के बाद से कैनबरा और होनियारा के बीच संबंधों में सुधार की गुंजाइश देखी जा रही है। अल्बनीज वहां के नए प्रधानमंत्री जेरेमिया मानेले के साथ मुलाकात करेंगे, जो पूर्व प्रधान मंत्री मनश्शे सोगावेरे की तुलना में ऑस्ट्रेलिया के साथ अधिक संतुलित संबंधों के पक्षधर माने जाते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेषकर वे जिनका संबंध फिजी से है (इंडो-फिजीयन), इस कूटनीतिक हलचल को काफी करीब से देख रहे हैं। प्रशांत द्वीप देशों में स्थिरता और सुरक्षा का सीधा असर ऑस्ट्रेलिया की व्यापारिक नीतियों और क्षेत्रीय शांति पर पड़ता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते दखल के बीच ऑस्ट्रेलिया का एक विश्वसनीय सुरक्षा भागीदार के रूप में उभरना पूरे क्षेत्र की समृद्धि के लिए आवश्यक है।
पीएम अल्बनीज की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य केवल औपचारिक समारोहों में भाग लेना नहीं है, बल्कि सोलोमन द्वीप को यह विश्वास दिलाना भी है कि ऑस्ट्रेलिया उनके बुनियादी ढांचे, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और सुरक्षा जरूरतों के लिए सबसे भरोसेमंद साथी है। फिजी के साथ हुए समझौते ने एक ब्लूप्रिंट तैयार किया है, जिसे ऑस्ट्रेलिया अब अन्य प्रशांत देशों के साथ भी दोहराना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अल्बनीज का यह 'क्विक डैश' यानी त्वरित दौरा यह दर्शाता है कि लेबर सरकार प्रशांत क्षेत्र में व्यक्तिगत कूटनीति (Personal Diplomacy) को अधिक महत्व दे रही है। होनियारा में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनकी उपस्थिति को एक सम्मानजनक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भविष्य में द्विपक्षीय वार्ता के लिए जमीन तैयार होगी। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या यह 'ब्रेकथ्रू' क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करने में सफल होता है या नहीं।
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