टेक्नोलॉजी
SC और OBC छात्रवृत्ति के लिए अब निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं, केंद्र सरकार ने नियमों में दी बड़ी ढील
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 11:23 am

केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति प्रक्रिया को सरल बनाते हुए निवास प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है।
भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया में एक ऐतिहासिक सुधार किया है। सरकार की नई डिजिटल पहलों के तहत अब इन श्रेणियों के छात्रों को छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए आवेदन करते समय निवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate) जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक बाधाओं को दूर करना और यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के मेधावी छात्रों को बिना किसी देरी के वित्तीय सहायता मिल सके।
विभाग द्वारा किए गए इन सुधारों का केंद्र बिंदु डिजिटल परिवर्तन और 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस' का सिद्धांत है। वर्तमान में, अधिकांश छात्रवृत्ति योजनाएं राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) के माध्यम से संचालित की जा रही हैं। सरकार ने इस पोर्टल को राज्य सरकारों के डेटाबेस और आधार (Aadhaar) प्रणाली से सीधे जोड़ दिया है। इस तकनीकी एकीकरण के कारण, छात्र के निवास और पात्रता की पुष्टि अब डिजिटल रूप से वास्तविक समय (real-time) में की जा सकती है। इससे न केवल छात्रों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी, बल्कि भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका भी समाप्त होगी।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। प्रवासी भारतीय अक्सर भारत में अपने विस्तारित परिवारों और रिश्तेदारों की शिक्षा में सहायता करते हैं। छात्रवृत्ति प्रक्रिया में इस तरह के सरलीकरण से उन परिवारों को लाभ होगा जिनके बच्चे भारत में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए जिला मुख्यालयों से निवास प्रमाण पत्र प्राप्त करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता था, जिसमें समय और धन दोनों की बर्बादी होती थी। अब आधार-आधारित सत्यापन के माध्यम से सीधे बैंक खातों में (DBT के जरिए) राशि हस्तांतरित की जाएगी।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार, इन डिजिटल सुधारों से पारदर्शिता बढ़ेगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में अन्य दस्तावेजों को भी डिजीटल लॉकर (DigiLocker) के माध्यम से सत्यापित किया जाएगा, जिससे भौतिक दस्तावेजों की जरूरत और भी कम हो जाएगी। यह पहल भारत के डिजिटल इंडिया मिशन का एक हिस्सा है, जो शिक्षा के क्षेत्र में समानता लाने और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
कुल मिलाकर, निवास प्रमाण पत्र की शर्त हटाना केवल एक प्रक्रियात्मक बदलाव नहीं है, बल्कि यह छात्रवृत्ति वितरण प्रणाली के प्रति सरकार के दृष्टिकोण में एक बड़े बदलाव का संकेत है। इससे न केवल आवेदनों के निपटान की गति बढ़ेगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित होगा कि कोई भी योग्य छात्र केवल कागजी कार्यवाही की कमी के कारण शिक्षा के अधिकार से वंचित न रह जाए।
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