राजनीति
न्यूजक्लिक केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने ईडी की कार्रवाई को बताया 'शक्तियों का दुरुपयोग', एफआईआर रद्द
ICN24 Newsroom 10 जून 2026, 11:30 pm
दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यूजक्लिक और प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ विदेशी फंडिंग मामले में ईओडब्ल्यू और ईडी की जांच को रद्द कर दिया है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में समाचार पोर्टल 'न्यूजक्लिक' और इसके संस्थापक-संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ दर्ज आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की एफआईआर और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मनी लॉन्ड्रिंग जांच को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने इस कार्रवाई को स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता पर सरकारी शक्तियों का 'मनमाना दुरुपयोग' करार दिया है। अदालत का यह फैसला प्रेस की स्वतंत्रता और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर चल रही लंबी कानूनी बहस में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियां किसी ठोस साक्ष्य के बिना ही इस मामले को खींचती रहीं। जस्टिस कृष्णा ने टिप्पणी की कि यदि एफआईआर में लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह सच भी मान लिया जाए, तो भी कानून की दृष्टि में धोखाधड़ी, जालसाजी या आपराधिक विश्वासघात का कोई मामला नहीं बनता है। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि ऐसी परिस्थितियों में कानूनी कार्रवाई को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग होगा और इससे नागरिकों के अधिकारों का हनन होता है।
यह मामला मुख्य रूप से न्यूजक्लिक को विदेशों से प्राप्त होने वाले निवेश और फंडिंग से जुड़ा था। एजेंसियों का आरोप था कि पोर्टल ने अवैध तरीके से विदेशी धन प्राप्त किया, जिसका उपयोग भारत विरोधी गतिविधियों के लिए किया गया। हालांकि, प्रबीर पुरकायस्थ और उनकी टीम ने शुरू से ही इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया था। प्रबीर पुरकायस्थ को पहले ही सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी के मामले में राहत मिल चुकी थी, जहां उनकी गिरफ्तारी को प्रक्रियात्मक आधार पर 'अमान्य' घोषित किया गया था। अब हाईकोर्ट के इस ताजा फैसले ने न्यूजक्लिक के खिलाफ आर्थिक अपराधों के मुख्य आधार को ही समाप्त कर दिया है।
भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में स्वतंत्र पत्रकारिता के महत्व को रेखांकित करते हुए अदालत ने कहा कि कानून का इस्तेमाल अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी यह खबर प्रासंगिक है, क्योंकि प्रवासी भारतीयों के बीच भारत में प्रेस की स्वतंत्रता और कानून के शासन को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं। वैश्विक मंचों पर भारत की छवि और लोकतांत्रिक मूल्यों की सुरक्षा की दृष्टि से भी दिल्ली हाईकोर्ट के इस निर्णय को विशेषज्ञों द्वारा सराहा जा रहा है।
कुल मिलाकर, अदालत का यह रुख उन दावों को मजबूती प्रदान करता है जिनमें यह तर्क दिया गया था कि जांच एजेंसियां अक्सर पर्याप्त सबूतों के अभाव में मीडिया संस्थानों को निशाना बनाती हैं। इस फैसले के बाद, अब प्रबीर पुरकायस्थ और न्यूजक्लिक के लिए कानूनी रास्ता काफी हद तक साफ हो गया है, जो पिछले कई वर्षों से विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों की जांच के घेरे में थे।
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