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NEET परीक्षा: प्रश्न-पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, NTA ने बढ़ाया विशेषज्ञों का दायरा
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 09:39 am
पेपर लीक विवाद के बाद NTA ने प्रश्न-पत्र बनाने की प्रक्रिया को और सख्त किया है। अब विशेषज्ञों का एक बड़ा समूह प्रश्न तैयार करेगा ताकि कोई भी पूरा पेपर न जान सके।
भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट' (NEET) को लेकर उपजे विवादों के बीच, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अब अपनी पूरी कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन करने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, NTA अब न केवल अंतिम प्रश्न-पत्र की सुरक्षा बढ़ा रही है, बल्कि उस प्रक्रिया को भी सुरक्षित बना रही है जिसके तहत प्रश्न-पत्र तैयार किए जाते हैं। इस नई रणनीति का मुख्य उद्देश्य 'पार्शियल एक्सेस' यानी आंशिक पहुंच के माध्यम से होने वाली गड़बड़ियों को जड़ से खत्म करना है।
हाल के दिनों में नीट परीक्षा की शुचिता पर उठे सवालों ने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय के बीच भी चिंता पैदा की है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय परिवारों के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है, क्योंकि कई प्रवासी छात्र अभी भी भारत की मेडिकल शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनने की आकांक्षा रखते हैं या उनके परिवार के सदस्य इन प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। एनबीई और एनटीए की साख पर उठते सवाल सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य और उनकी वर्षों की मेहनत से जुड़े हैं।
नई व्यवस्था के तहत, एनटीए ने प्रश्न तैयार करने वाले विशेषज्ञों और प्रोफेसरों के पैनल (Pool of Experts) का विस्तार करने का फैसला किया है। पहले की तुलना में अब कहीं अधिक संख्या में विशेषज्ञ अलग-अलग विषयों के लिए प्रश्न बैंक में अपना योगदान देंगे। इस रणनीति के पीछे मुख्य तर्क यह है कि यदि विशेषज्ञों की संख्या बहुत अधिक होगी और उनमें से प्रत्येक केवल कुछ ही प्रश्न तैयार करेगा, तो किसी भी एक व्यक्ति या छोटे समूह के लिए पूरे प्रश्न-पत्र की रूपरेखा को जान पाना लगभग असंभव हो जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, पेपर लीक की अधिकांश घटनाओं में कहीं न कहीं 'पार्शियल एक्सेस' की भूमिका होती है, जहाँ प्रक्रिया के किसी चरण में किसी व्यक्ति को प्रश्न-पत्र के एक हिस्से की जानकारी मिल जाती है। एनटीए अब 'वैल्यू ऑफ पार्शियल एक्सेस' को कम करने पर काम कर रही है। यानी, अगर किसी के पास कुछ प्रश्नों की जानकारी आ भी जाए, तो वह पूरे परीक्षा परिणाम को प्रभावित करने की स्थिति में न हो। इसके अलावा, प्रश्न-पत्रों के कई सेट तैयार किए जाएंगे और अंतिम समय तक यह गोपनीय रखा जाएगा कि किस सेट का उपयोग मुख्य परीक्षा में होगा।
ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारतीय मूल के डॉक्टर और छात्र वहां की स्वास्थ्य प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत की प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी न केवल छात्रों के मनोबल को तोड़ती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय शैक्षणिक डिग्रियों की विश्वसनीयता पर भी प्रभाव डाल सकती है। यही कारण है कि एनटीए द्वारा किए जा रहे ये सुरक्षात्मक उपाय वैश्विक स्तर पर भारतीय समुदाय के लिए राहत की खबर हैं।
आने वाले समय में, तकनीकी हस्तक्षेप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग पर भी विचार किया जा रहा है ताकि प्रश्न-पत्रों के चयन में मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम किया जा सके। सरकार और एनटीए का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा केवल योग्य उम्मीदवारों की प्रतिभा का ही पैमाना बनी रहे, न कि भ्रष्टाचार का माध्यम।
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