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मॉन्ट रॉयल रिसोर्सेज ने आश्रम प्रोजेक्ट के लिए पीईए (PEA) तकनीकी रिपोर्ट पेश की; एएसएक्स निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 08:38 am
मॉन्ट रॉयल रिसोर्सेज ने कनाडा स्थित आश्रम प्रोजेक्ट के लिए प्रारंभिक आर्थिक मूल्यांकन (PEA) रिपोर्ट फाइल की है, जो दुर्लभ मृदा तत्वों के खनन में एक बड़ी उपलब्धि है।
मॉन्ट रॉयल रिसोर्सेज लिमिटेड (ASX: MRZ) ने कनाडा के क्यूबेक क्षेत्र में स्थित अपने प्रमुख आश्रम रेयर अर्थ (दुर्लभ मृदा) और फ्लोर्सपार प्रोजेक्ट के लिए 'प्रारंभिक आर्थिक मूल्यांकन' (PEA) तकनीकी रिपोर्ट आधिकारिक रूप से फाइल कर दी है। यह रिपोर्ट परियोजना के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो इसकी आर्थिक व्यवहार्यता और वैश्विक खनिज बाजार में इसकी स्थिति को मजबूत करती है।
आश्रम परियोजना दुनिया के सबसे बड़े दुर्लभ मृदा भंडारों में से एक मानी जाती है। तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना में न केवल उच्च श्रेणी के रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) मौजूद हैं, बल्कि इसमें फ्लोर्सपार का भी विशाल भंडार है। यह दोहरा लाभ परियोजना को आर्थिक रूप से बेहद आकर्षक बनाता है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा और उच्च तकनीक प्रणालियों के लिए इन खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
ऑस्ट्रेलियाई स्टॉक एक्सचेंज (ASX) पर सूचीबद्ध होने के कारण, मॉन्ट रॉयल की इस प्रगति का भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों के लिए विशेष महत्व है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय का एक बड़ा हिस्सा शेयर बाजार और विशेष रूप से माइनिंग (खनन) सेक्टर में निवेश करता है। इस क्षेत्र में तकनीकी रिपोर्ट का आना इस बात का संकेत है कि कंपनी अब खोज (exploration) के चरण से निकलकर विकास और उत्पादन की ओर कदम बढ़ा रही है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ता है।
रिपोर्ट के वित्तीय पहलुओं पर नजर डालें तो पीईए एक लंबी खान अवधि (mine life) और आकर्षक 'नेट प्रेजेंट वैल्यू' (NPV) की पुष्टि करती है। यह डेटा संभावित निवेशकों और भागीदारों को परियोजना की लाभप्रदता का सटीक आकलन करने में मदद करता है। इसके अलावा, कनाडा का क्यूबेक क्षेत्र अपनी माइनिंग-फ्रेंडली नीतियों के लिए जाना जाता है, जो परियोजना के सफल संचालन की संभावनाओं को और बढ़ा देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्लभ मृदा तत्वों के मामले में चीन पर निर्भरता कम करने की वैश्विक रणनीति के तहत आश्रम प्रोजेक्ट एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी, पवन टरबाइन और रक्षा उपकरणों में उपयोग होने वाले इन खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाना भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों के रणनीतिक हितों में शामिल है। मॉन्ट रॉयल की यह प्रगति न केवल कंपनी के लिए, बल्कि भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।
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