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भारत के सांख्यिकीय डेटाबेस में बड़े बदलाव क्यों? जानिए अर्थव्यवस्था के नए आंकड़ों का महत्व

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 10:11 pm
भारत के सांख्यिकीय डेटाबेस में बड़े बदलाव क्यों? जानिए अर्थव्यवस्था के नए आंकड़ों का महत्व

भारत सरकार अपनी अर्थव्यवस्था के प्रमुख आंकड़ों जैसे जीडीपी और मुद्रास्फीति की गणना के तरीकों में बड़े बदलाव कर रही है, ताकि आधुनिक आर्थिक परिदृश्य को बेहतर ढंग से समझा जा सके।

भारत सरकार अपनी सांख्यिकीय प्रणाली में एक व्यापक बदलाव की प्रक्रिया से गुजर रही है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने राष्ट्रीय लेखा (National Accounts), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) जैसे प्रमुख आर्थिक संकेतकों के आधार वर्ष (Base Year) को बदलने और उनकी गणना के तरीकों को आधुनिक बनाने की योजना बनाई है। यह कदम न केवल भारत की घरेलू नीति निर्धारण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय निवेशकों और व्यवसायियों के लिए भी बेहद मायने रखता है जो भारतीय बाजार पर पैनी नजर रखते हैं। इस ओवरहाल की सबसे बड़ी जरूरत मौजूदा आंकड़ों के पुराना होने के कारण महसूस की गई। वर्तमान में, भारत के अधिकांश आर्थिक संकेतकों के लिए आधार वर्ष 2011-12 है। पिछले एक दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं, विशेष रूप से डिजिटल क्रांति, ई-कॉमर्स का विस्तार और नई विनिर्माण श्रेणियों का उदय। पुराने डेटाबेस इन बदलावों को पूरी तरह से पकड़ने में सक्षम नहीं थे, जिससे अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर धुंधली हो सकती थी। राष्ट्रीय लेखा और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुमानों में बदलाव के तहत, सरकार अब 'जीएसटी' (GST) डेटा और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के व्यापक डेटाबेस का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करेगी। इससे असंगठित क्षेत्र और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का अधिक सटीक आकलन संभव हो पाएगा। नए आधार वर्ष के लागू होने से भारत की आर्थिक विकास दर के आंकड़ों में सुधार होने की उम्मीद है, क्योंकि इसमें उन नए उद्योगों को शामिल किया जाएगा जो 2012 के बाद अस्तित्व में आए हैं। औद्योगिक उत्पादन (IIP) के मापन में भी महत्वपूर्ण सुधार किए जा रहे हैं। वस्तुओं की पुरानी बास्केट (Basket of Goods) को अपडेट किया जा रहा है ताकि इसमें मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों जैसे आधुनिक उत्पादों को शामिल किया जा सके। पुराने ढांचे में कई ऐसे उत्पाद शामिल थे जिनका उत्पादन अब नगण्य है, जबकि उभरते हुए सेक्टरों की हिस्सेदारी कम दिखाई देती थी। मुद्रास्फीति या महंगाई के संकेतकों (CPI) में बदलाव आम जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। वर्तमान उपभोक्ता बास्केट में भोजन पर खर्च को अधिक महत्व दिया गया है, जबकि वास्तव में मध्यम वर्ग का खर्च अब स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन और मनोरंजन पर बढ़ गया है। नई प्रणाली में इन सेवाओं को अधिक वेटेज (Weightage) दिया जाएगा, जिससे महंगाई के आंकड़े जमीनी हकीकत के अधिक करीब होंगे। ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय के लिए, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो भारत के साथ व्यापार करते हैं या वहां निवेश करते हैं, यह डेटा अपग्रेड अधिक पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करेगा। सटीक डेटा से जोखिम कम होता है और भविष्य की योजना बनाने में आसानी होती है। अंततः, इन सुधारों का उद्देश्य भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है।
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