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समुद्री करियर के प्रति बढ़ता आकर्षण: IMU-CET आवेदनों में भारी वृद्धि, वैश्विक स्तर पर भारत का बढ़ता कद
ICN24 Newsroom 7 जुल॰ 2026, 05:31 am

भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (IMU) की प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदनों में भारी उछाल आया है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत समुद्री कार्यबल के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है।
नई दिल्ली/चेन्नई: भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (IMU) द्वारा आयोजित होने वाली कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (IMU-CET) के लिए आवेदनों की संख्या में इस वर्ष जबरदस्त उछाल देखा गया है। यह वृद्धि भारतीय युवाओं के बीच समुद्री क्षेत्र (Maritime Sector) में करियर बनाने के प्रति बढ़ते रुझान को दर्शाती है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा है कि भारत अब वैश्विक समुद्री कार्यबल को मजबूत करने में एक अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है।
मंत्री सोनोवाल के अनुसार, भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय विश्व के अग्रणी समुद्री विश्वविद्यालयों की श्रेणी में तेजी से ऊपर चढ़ा है। उन्होंने बताया कि जिस तरह से आवेदनों की संख्या बढ़ी है, उससे स्पष्ट है कि भारत का समुद्री प्रशिक्षण और शिक्षा मानक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप, भारत का लक्ष्य 'मैरीटाइम इंडिया विजन 2030' के तहत दुनिया के प्रमुख समुद्री देशों में शामिल होना है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह विकास विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया एक द्वीप महाद्वीप होने के नाते अपनी अर्थव्यवस्था के लिए समुद्री व्यापार और रसद (Logistics) पर अत्यधिक निर्भर है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर कुशल समुद्री पेशेवरों की भारी मांग रहती है। भारतीय समुद्री क्षेत्र में बढ़ती विशेषज्ञता और IMU जैसे संस्थानों से निकलने वाले पेशेवर न केवल भारत में बल्कि ऑस्ट्रेलिया जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी उच्च पदों पर आसीन हो रहे हैं। यह द्विपक्षीय व्यापार और पेशेवर आवाजाही के नए रास्ते खोलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री क्षेत्र में बढ़ती दिलचस्पी का एक बड़ा कारण इस क्षेत्र में मिलने वाला आकर्षक वेतन पैकेज और वैश्विक स्तर पर यात्रा करने का अवसर है। इसके अलावा, भारत सरकार द्वारा 'सागरमाला' परियोजना और नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) को दिए जा रहे बढ़ावा ने भी युवाओं को इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया है। IMU-CET के माध्यम से छात्र मरीन इंजीनियरिंग, नॉटिकल साइंस और नेवल आर्किटेक्चर जैसे विशेष पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाते हैं।
सोनोवाल ने यह भी रेखांकित किया कि समुद्री उद्योग अब केवल जहाज चलाने तक सीमित नहीं रह गया है। डिजिटल शिपिंग, ग्रीन एनर्जी और समुद्री डेटा एनालिटिक्स जैसे नए क्षेत्रों के उदय ने इस उद्योग को आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत बना दिया है। भारतीय पेशेवर अब इन नई तकनीकों को अपनाने में सबसे आगे हैं, जिससे वैश्विक शिपिंग कंपनियों में उनकी मांग बढ़ी है।
अंत में, मंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे समुद्री क्षेत्र को केवल एक नौकरी के रूप में नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण के एक माध्यम के रूप में देखें। भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति न केवल देश की अर्थव्यवस्था को गति देगी, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका को भी अपरिहार्य बनाएगी।
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