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जीएसटी मामला: केरल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, धारा 16(4) की समय सीमा आईटीसी के लिए दी गई रियायत को नहीं रोक सकती
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 01:04 am

केरल उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जीएसटी कानून की धारा 16(4) के तहत आईटीसी दावा करने की समय सीमा, धारा 16(5) में दी गई विशेष छूट को बाधित नहीं कर सकती।
केरल उच्च न्यायालय ने हाल ही में वस्तु एवं सेवा कर (GST) कानून की व्याख्या करते हुए करदाताओं के पक्ष में एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) अधिनियम की धारा 16(4) के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा करने के लिए निर्धारित समय सीमा, अधिनियम की ही धारा 16(5) के तहत प्रदान की गई रियायत या 'ग्रेस पीरियड' को निष्प्रभावी नहीं कर सकती है। यह फैसला उन हजारों व्यवसायियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जिन्हें तकनीकी आधार पर आईटीसी के लाभ से वंचित कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। मामले के अनुसार, एक करदाता को इस आधार पर आईटीसी देने से इनकार कर दिया गया था कि उसने धारा 16(4) द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना रिटर्न दाखिल नहीं किया था। हालांकि, करदाता का तर्क था कि हालिया विधायी संशोधनों के तहत धारा 16(5) में जो विशेष प्रावधान किए गए हैं, वे उसे राहत प्रदान करते हैं। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए संबंधित कर अधिकारी द्वारा जारी किए गए उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें करदाता के दावे को खारिज किया गया था।
अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि कानून का उद्देश्य करदाताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाना है। धारा 16(5) को विशेष रूप से उन परिस्थितियों के लिए लाया गया है जहां करदाताओं को कुछ विशिष्ट वित्तीय वर्षों के लिए अतिरिक्त समय या छूट की आवश्यकता होती है। यदि धारा 16(4) की कठोर समय सीमा को धारा 16(5) पर हावी होने दिया जाता है, तो कानून के इस नए प्रावधान का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। उच्च न्यायालय ने जोर देकर कहा कि वैधानिक प्रावधानों की व्याख्या इस तरह से की जानी चाहिए कि वे एक-दूसरे के पूरक हों, न कि एक-दूसरे के विरोधी।
भारत-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय और ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय मूल के उन उद्यमियों के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है जिनके व्यापारिक हित भारत में हैं। भारत में जीएसटी नियमों की जटिलता अक्सर प्रवासी भारतीय (NRI) निवेशकों के लिए चिंता का विषय रही है। इस तरह के न्यायिक स्पष्टीकरण से भारतीय कर प्रणाली में विश्वास बढ़ता है और यह संकेत मिलता है कि न्यायपालिका नियमों की कठोरता के बजाय विधायी मंशा और निष्पक्षता को प्राथमिकता दे रही है। यदि आपका भारत में कोई सहायक व्यवसाय या स्टार्टअप है, तो यह निर्णय आपके कर अनुपालन (Tax Compliance) और वित्तीय नियोजन को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि केरल उच्च न्यायालय का यह फैसला देश के अन्य उच्च न्यायालयों के लिए भी एक मिसाल बनेगा। जीएसटी परिषद ने समय-समय पर धारा 16 में संशोधन किए हैं ताकि ईमानदार करदाताओं को प्रक्रियाओं की भूलभुलैया में फंसने से बचाया जा सके। इस निर्णय के बाद, अब कर विभाग उन मामलों को दोबारा देखने के लिए मजबूर होगा जहां धारा 16(4) का हवाला देकर धारा 16(5) के लाभों को अस्वीकार कर दिया गया था।
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