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केरल बजट: ₹1.22 लाख करोड़ के 'प्रतिबद्ध व्यय' पर चुप्पी ने बढ़ाई चिंता, प्रवासी समुदाय में भी चर्चा
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 01:26 pm

श्वेत पत्र की चेतावनियों के बावजूद केरल बजट में वेतन और पेंशन जैसे भारी खर्चों को कम करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं दी गई है, जो कुल राजस्व का 75% हिस्सा है।
केरल सरकार द्वारा पेश किए गए हालिया बजट ने राज्य के आर्थिक भविष्य और वित्तीय प्रबंधन को लेकर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। बजट की सबसे अधिक आलोचना इस बात को लेकर हो रही है कि इसमें 'प्रतिबद्ध व्यय' (Committed Expenditure) को नियंत्रित करने के लिए किसी भी प्रभावी रणनीति का उल्लेख नहीं किया गया है। यह चुप्पी तब और भी चौंकाने वाली लगती है, जब राज्य सरकार द्वारा ही जारी किए गए हालिया 'श्वेत पत्र' में वित्तीय संकट की स्पष्ट चेतावनी दी गई थी।
आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2026-27 तक केरल का प्रतिबद्ध व्यय ₹1.22 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर जाने की संभावना है। इस व्यय में मुख्य रूप से सरकारी कर्मचारियों का वेतन, सेवानिवृत्त कर्मियों की पेंशन और पुराने कर्ज पर दिया जाने वाला ब्याज शामिल है। वर्तमान आंकड़ों का विश्लेषण करें तो राज्य के कुल राजस्व का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा (75 प्रतिशत) केवल इन्हीं तीन मदों की भेंट चढ़ जाता है। इसका सीधा और कड़वा अर्थ यह है कि राज्य के पास स्वास्थ्य, शिक्षा और नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं जैसी विकासशील गतिविधियों के लिए केवल 25 प्रतिशत बजट ही शेष बचता है।
वित्तीय विशेषज्ञों का तर्क है कि जब तक वेतन और पेंशन के इस विशाल ढांचे में सुधार नहीं किया जाता, तब तक राज्य का 'राजस्व घाटा' कम होना नामुमकिन है। बजट में राजस्व बढ़ाने के लिए कुछ कर प्रस्ताव तो रखे गए हैं, लेकिन खर्च के मोर्चे पर अनुशासन का अभाव दिखता है। श्वेत पत्र में स्पष्ट रूप से 'ऋण जाल' (Debt Trap) के खतरे का संकेत दिया गया था, लेकिन बजट घोषणाओं में उस चेतावनी की अनदेखी की गई है। बुनियादी ढांचे पर खर्च में कमी आने से राज्य की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से मलयाली प्रवासियों के लिए केरल की यह आर्थिक स्थिति गहरी चिंता का विषय है। ऑस्ट्रेलिया में बसे हजारों केरलवासी अपने परिवारों की देखभाल और निवेश के लिए अपनी जन्मभूमि पर निर्भर हैं। राज्य में वित्तीय संकट का अर्थ है सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में गिरावट और बुनियादी ढांचे का रुकना, जिससे वहां रह रहे उनके बुजुर्ग माता-पिता और परिजनों का जीवन स्तर प्रभावित होता है। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया से भेजे जाने वाले रेमिटेंस (प्रेषण) का बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट और स्थानीय व्यवसायों में निवेश होता है, जो राज्य की आर्थिक स्थिरता पर निर्भर करते हैं।
यदि राज्य सरकार अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं को फिर से निर्धारित नहीं करती है, तो आगामी वर्षों में विकास कार्यों के लिए फंड जुटाना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि केरल को अपनी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को बनाए रखने के लिए कठोर वित्तीय सुधारों की आवश्यकता है। केवल आय बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना पर्याप्त नहीं होगा; बल्कि खर्चों को तर्कसंगत बनाना और प्रतिबद्ध व्यय के बढ़ते बोझ को कम करना ही राज्य को स्थायी आर्थिक पथ पर वापस ला सकता है।
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