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कर्नाटक में बड़ा बदलाव: उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का 'मास्टरप्लान', ₹20,000 करोड़ की योजनाओं से संवरेगा राज्य
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 12:22 pm

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्य के विकास के लिए 25-30 नई योजनाओं का खाका तैयार किया है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर ₹20,000 करोड़ तक का निवेश प्रस्तावित है।
बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में विकास की नई इबारत लिखने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने एक व्यापक विकास रणनीति का खाका तैयार किया है, जिसके तहत 25 से 30 नई योजनाएं शुरू की जाएंगी। लगभग 10,000 से 20,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य राज्य के बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन लाना है।
आगामी बजट और सरकार के 'विज़न डॉक्यूमेंट' को ध्यान में रखते हुए, शिवकुमार का यह कदम उनकी प्रशासनिक पकड़ और भविष्य की राजनीति को मजबूती देने वाला माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इन योजनाओं में ग्रामीण सड़कों के जाल को बिछाने से लेकर आधुनिक एग्री-टेक (कृषि-तकनीक) और 'प्रोटीन मिशन' जैसे अभिनव कार्यक्रम शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य बजट प्राथमिकताओं को पुनर्गठित कर उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना है, जो सीधे तौर पर आम जनता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर कर्नाटक मूल के प्रवासियों के लिए यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में बसने वाले हजारों 'कन्नडिगा' पेशेवर अक्सर बेंगलुरु के बुनियादी ढांचे और राज्य में निवेश की संभावनाओं पर नजर रखते हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में इस स्तर का निवेश न केवल राज्य के जीवन स्तर को सुधारेगा, बल्कि भविष्य में वैश्विक निवेशकों और प्रवासियों के लिए भी राज्य को एक आकर्षक केंद्र बनाएगा।
योजनाओं के विवरण के अनुसार, कृषि क्षेत्र में सरकार का ध्यान 'एग्री-टेक' पर केंद्रित है, ताकि किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनकी आय बढ़ाई जा सके। वहीं, स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ पोषण की समस्या से निपटने के लिए एक विशेष 'प्रोटीन मिशन' शुरू करने की योजना है। शिक्षा क्षेत्र में भी डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए बड़े बजट का प्रावधान किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डीके शिवकुमार का यह 'योजनाओं का महाकुंभ' (Scheme Blitz) केवल विकास तक सीमित नहीं है। यह आने वाले समय में उनकी राजनीतिक साख को और भी मजबूत करने का एक माध्यम हो सकता है। बुनियादी ढांचे पर यह जोर बेंगलुरु जैसे महानगरों के यातायात और जल निकासी जैसी पुरानी समस्याओं को दूर करने में भी मददगार साबित हो सकता है, जिसकी मांग प्रवासी भारतीयों द्वारा लंबे समय से की जाती रही है। आने वाले हफ्तों में, सरकार इन योजनाओं के वित्तीय आवंटन और कार्यान्वयन के लिए एक आधिकारिक समय-सीमा जारी कर सकती है।
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