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झारखंड के छात्रों ने पेश की विरोध की नई मिसाल; JPSC और JSSC भर्ती घोटाले के खिलाफ अनुशासित आंदोलन

ICN24 Newsroom 17 अग॰ 2026, 07:37 am
झारखंड के छात्रों ने पेश की विरोध की नई मिसाल; JPSC और JSSC भर्ती घोटाले के खिलाफ अनुशासित आंदोलन

रांची में छात्रों का आंदोलन सरकारी भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सशक्त और अनुशासित उदाहरण बनकर उभरा है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है।

झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों और युवाओं का आंदोलन देश में विरोध प्रदर्शनों के लिए एक नई मिसाल पेश कर रहा है। 25 जुलाई 2026 से शुरू हुआ यह आंदोलन मुख्य रूप से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार, पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ केंद्रित है। इस आंदोलन ने न केवल राज्य का, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी भारतीयों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है, जो भारत में प्रशासनिक पारदर्शिता और शुचिता के समर्थक रहे हैं। इस आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता इसका गैर-राजनीतिक स्वरूप है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा को अपने मंच का उपयोग नहीं करने देंगे। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बैठे इन अभ्यर्थियों का नेतृत्व खुद छात्र कर रहे हैं, जिनमें देवेंद्र नाथ महतो जैसे नाम प्रमुख हैं। महतो ने 2 अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। छात्रों की मुख्य मांग है कि दागी परीक्षाओं को रद्द किया जाए और पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराई जाए। दिलचस्प बात यह है कि इस आंदोलन की तुलना दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए हालिया प्रदर्शनों से की जा रही है। जहां दिल्ली के प्रदर्शनों में राजनीतिक दखल और उग्रता देखने को मिली थी, वहीं रांची के छात्रों ने धैर्य और शालीनता का परिचय दिया है। प्रदर्शनकारियों ने देशभक्ति के गीतों और भजनों के माध्यम से अपनी बात रखी है। वामपंथी छात्र संगठनों या अन्य राजनीतिक गुटों के नेताओं को मंच से दूर रखकर, इन युवाओं ने यह साबित किया है कि वास्तविक मुद्दों के लिए लड़ाई बिना किसी बाहरी एजेंडे के भी लड़ी जा सकती है। 10 और 11 अगस्त 2026 को आंदोलन अपने चरम पर पहुंचा, जब हजारों छात्रों ने झारखंड विधानसभा की ओर मार्च करने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, जिसमें कई छात्र घायल हुए। हालांकि, इस दमन के बावजूद आंदोलनकारियों ने अपनी भाषा और व्यवहार की मर्यादा नहीं खोई। मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने आंदोलन को बाहर से समर्थन देते हुए 11 अगस्त को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया था, जिससे सरकार पर दबाव और बढ़ गया है। ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय के लिए, जो अक्सर अपने गृह राज्यों में शासन की गुणवत्ता पर नज़र रखते हैं, यह आंदोलन एक सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि भारतीय युवा अब केवल नारेबाजी में नहीं, बल्कि ठोस व्यवस्था परिवर्तन और योग्यता आधारित चयन (Meritocracy) में विश्वास रखते हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने अब बातचीत के संकेत दिए हैं और एक कैबिनेट मंत्री को आंदोलनकारियों से मिलने भेजा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार छात्रों की सीबीआई जांच की मांग को स्वीकार करती है या आंदोलन आगे भी जारी रहता है।
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