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एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में दर्ज किया शानदार प्रदर्शन, राजस्व 6,795 करोड़ रुपये के पार
ICN24 Newsroom 17 अग॰ 2026, 02:37 am

भारत की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक कंपनी एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में 6,795 करोड़ रुपये का राजस्व और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।
भारत की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक कंपनी, एनएमडीसी लिमिटेड (NMDC) ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही (Q1) के लिए अपने वित्तीय परिणामों की घोषणा कर दी है। हैदराबाद स्थित इस सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) ने वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद एक मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का कुल राजस्व 6,795 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो भारत की बढ़ती औद्योगिक मांग और बुनियादी ढांचे के विकास की गति को दर्शाता है।
वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, एनएमडीसी ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 9.19 मिलियन टन (MT) लौह अयस्क का उत्पादन किया है। बिक्री के मोर्चे पर भी कंपनी का प्रदर्शन सराहनीय रहा है, जहां इसने 10.07 मिलियन टन की बिक्री दर्ज की। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में उत्पादन और बिक्री दोनों में महत्वपूर्ण सुधार दर्शाता है। कंपनी का कर-पूर्व लाभ (PBT) और कर-पश्चात लाभ (PAT) भी बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा है, जो इसकी परिचालन दक्षता को सिद्ध करता है।
एनएमडीसी के इस प्रदर्शन का महत्व भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी विशेष है। ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ही वैश्विक खनन क्षेत्र के प्रमुख खिलाड़ी हैं। जहां ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे बड़ा लौह अयस्क निर्यातक है, वहीं भारत का एनएमडीसी जैसे संस्थानों के माध्यम से अपनी घरेलू क्षमता बढ़ाना वैश्विक कमोडिटी बाजार के संतुलन को प्रभावित करता है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय पेशेवर, जो संसाधन और ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत हैं, एनएमडीसी की प्रगति को भारत की इस्पात निर्माण क्षमता के संकेतक के रूप में देखते हैं। भारत में इस्पात की बढ़ती मांग का सीधा असर ऑस्ट्रेलिया से होने वाले कोकिंग कोल (Coking Coal) के निर्यात पर भी पड़ता है।
एनएमडीसी के प्रबंधन ने इस सफलता का श्रेय उन्नत तकनीक के उपयोग और लॉजिस्टिक्स में सुधार को दिया है। कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता को भविष्य में 100 मिलियन टन प्रति वर्ष तक ले जाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। इसके अतिरिक्त, कंपनी पर्यावरणीय, सामाजिक और गवर्नेंस (ESG) मानकों पर भी जोर दे रही है, जो आधुनिक खनन उद्योग के लिए अनिवार्य होता जा रहा है। डिजिटल परिवर्तन और खदानों के मशीनीकरण ने परिचालन लागत को कम करने में मदद की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी आने से लौह अयस्क की मांग और बढ़ेगी। एनएमडीसी की यह मजबूत शुरुआत न केवल निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत के विजन को भी मजबूती प्रदान करती है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, एनएमडीसी का यह प्रदर्शन भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की बढ़ती क्षमता और रणनीतिक दूरदर्शिता का प्रमाण है।
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