राजनीति
चंदौली: प्रोटोकॉल उल्लंघन पर मचा बवाल, एडीएम के खिलाफ तहसील में जोरदार धरना
ICN24 Newsroom 17 अग॰ 2026, 08:37 am

चंदौली में प्रशासनिक प्रोटोकॉल का पालन न करने पर विवाद गहरा गया है। एडीएम के न पहुंचने से नाराज लोगों ने तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में प्रशासनिक लापरवाही और प्रोटोकॉल के उल्लंघन का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिले के अपर जिलाधिकारी (एडीएम) के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत न पहुंचने से नाराज स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने तहसील परिसर में मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी जनता की समस्याओं और औपचारिक प्रक्रियाओं के प्रति संवेदनहीन होते जा रहे हैं, जिसके विरोध में उन्होंने धरना शुरू कर दिया है।
घटनाक्रम के अनुसार, एक पूर्व निर्धारित कार्यक्रम और बैठक के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को आमंत्रित किया गया था। सरकारी नियमावली और प्रोटोकॉल के तहत वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य थी। हालांकि, घंटों इंतजार के बाद भी जब एडीएम मौके पर नहीं पहुंचे और न ही उनकी ओर से कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण दिया गया, तो वहां मौजूद लोगों का धैर्य जवाब दे गया। प्रदर्शनकारियों ने इसे न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया, बल्कि इसे आम जनता और स्थानीय नेताओं का अपमान भी करार दिया।
तहसील परिसर में धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि यह केवल एक अधिकारी की अनुपस्थिति का मामला नहीं है, बल्कि यह उस प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को दर्शाता है जहां अधिकारी खुद को जवाबदेही से ऊपर समझने लगे हैं। धरने के दौरान 'प्रशासनिक तानाशाही नहीं चलेगी' जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि संबंधित अधिकारी इस लापरवाही के लिए सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दें और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसकी लिखित गारंटी दी जाए।
चंदौली जैसे जिलों में, जहां विकास कार्य और जनसुनवाई के लिए अधिकारियों का सक्रिय रहना अनिवार्य है, इस तरह के विवाद प्रशासन और जनता के बीच की खाई को और चौड़ा करते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए यह समाचार चिंता का विषय है। प्रवासी भारतीय अक्सर अपने पैतृक स्थानों में प्रशासनिक पारदर्शिता की उम्मीद करते हैं, और इस तरह की घटनाएं शासन प्रणाली पर सवालिया निशान लगाती हैं।
फिलहाल, मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और वरिष्ठ अधिकारी प्रदर्शनकारियों को समझाने-बुझाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक उच्चाधिकारी स्वयं आकर वार्ता नहीं करते, तब तक धरना समाप्त नहीं होगा। यह घटना उत्तर प्रदेश में नौकरशाही के कामकाज और प्रोटोकॉल की गंभीरता पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
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