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अमेरिकी सेना में ईरान संघर्ष को लेकर 'खामोश विद्रोह' की खबरें: रिपोर्टों ने बढ़ाई वैश्विक चिंता
ICN24 Newsroom 17 अग॰ 2026, 07:37 am

हैल टर्नर रेडियो शो की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ संभावित सैन्य संघर्ष को लेकर अमेरिकी सशस्त्र बलों के भीतर असंतोष और 'खामोश विद्रोह' की स्थिति देखी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय रक्षा और कूटनीतिक हलकों में उस समय खलबली मच गई जब 'हैल टर्नर रेडियो शो' ने अमेरिकी सैन्य बलों के भीतर एक कथित 'खामोश विद्रोह' (Quiet Revolt) की सूचना दी। रिपोर्टों के अनुसार, यह आंतरिक असंतोष ईरान के साथ एक नए और संभावित विनाशकारी सैन्य संघर्ष की आशंकाओं से उपजा है। यद्यपि पेंटागन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन वैकल्पिक मीडिया आउटलेट्स और सैन्य विश्लेषकों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है।
खबर के विवरण के अनुसार, अमेरिकी सेना के विभिन्न स्तरों पर अधिकारी और जवान ईरान के साथ पूर्ण युद्ध की रणनीतिक उपयोगिता पर सवाल उठा रहे हैं। यह स्थिति ऐसे समय में आई है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सैन्य कर्मियों के बीच इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि ईरान के साथ संघर्ष न केवल अमेरिकी संसाधनों पर बोझ डालेगा, बल्कि यह पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है। इस 'विद्रोह' को पारंपरिक विद्रोह के रूप में नहीं, बल्कि आदेशों के क्रियान्वयन में सुस्ती और नीतिगत फैसलों पर आंतरिक असहमति के रूप में देखा जा रहा है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया, जो अमेरिका का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार और ऑकस (AUKUS) समझौते का हिस्सा है, अक्सर मध्य पूर्व में अमेरिकी अभियानों का समर्थन करता रहा है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ता है, तो ऑस्ट्रेलिया की रक्षा नीति और उसकी अपनी सेना की भूमिका पर भी दबाव बढ़ सकता है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय मूल के प्रवासियों के लिए भी इसके आर्थिक परिणाम चिंताजनक हो सकते हैं, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और भारत को होने वाली ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है।
भारत के परिप्रेक्ष्य में देखें तो ईरान के साथ भारत के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। चाबहार बंदरगाह जैसी परियोजनाएं भारत के लिए मध्य एशिया का द्वार हैं। अमेरिकी सेना के भीतर किसी भी प्रकार का आंतरिक तनाव यह संकेत देता है कि वाशिंगटन में विदेश नीति को लेकर मतभेद गहरा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी नेतृत्व अपनी ही सेना को पूर्ण विश्वास में लेने में विफल रहता है, तो किसी भी सैन्य कार्रवाई की प्रभावशीलता कम हो सकती है।
निष्कर्षतः, हैल टर्नर की यह रिपोर्ट अभी दावों के स्तर पर है, लेकिन यह वैश्विक सुरक्षा के बदलते समीकरणों की ओर इशारा करती है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के लिए, यह समय अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखने का है, क्योंकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और मध्य पूर्व की स्थिरता एक-दूसरे से जटिल रूप से जुड़ी हुई हैं। आगामी दिनों में जो बाइडेन प्रशासन और रक्षा विभाग के रुख से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इन दावों में कितनी सच्चाई है।
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