राजनीति
झारखंड में JPSC छात्रों का प्रदर्शन: पुलिस की सख्ती और कांग्रेस की चुप्पी पर उठे सवाल
ICN24 Newsroom 11 अग॰ 2026, 04:38 am
झारखंड में JPSC परीक्षा की गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। पुलिस की कार्रवाई और कांग्रेस की चुप्पी पर अब राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं।
झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बनी हुई है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया में देरी के खिलाफ छात्र बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे हैं। हालांकि, इस विरोध प्रदर्शन ने उस समय एक गंभीर मोड़ ले लिया जब प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और छात्रों की धरपकड़ ने राज्य की राजनीति में उबाल ला दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा सत्ताधारी गठबंधन में शामिल कांग्रेस पार्टी की चुप्पी को लेकर हो रही है। राजनीतिक विश्लेषक और विपक्षी दल यह सवाल उठा रहे हैं कि जो कांग्रेस दिल्ली में संसद के भीतर और बाहर छात्र हितों और नीट (NEET) जैसी परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर मुखर रहती है, वह झारखंड में अपने ही गठबंधन वाली सरकार के दौरान छात्रों पर हो रही पुलिसिया कार्रवाई पर मौन क्यों है? यह स्थिति कांग्रेस के लिए एक 'दोहरे मापदंड' वाली छवि पेश कर रही है, जिससे युवाओं के बीच पार्टी की साख पर असर पड़ सकता है।
झारखंड के छात्रों की मुख्य मांगें जेपीएससी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने, लंबित परिणामों को जारी करने और भर्ती कैलेंडर को नियमित करने से जुड़ी हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राज्य सरकार उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय बल प्रयोग कर उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। रांची में हुए लाठीचार्ज की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर काफी आक्रोश पैदा किया है, जहां निहत्थे छात्रों पर पुलिस की सख्ती देखी जा सकती है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर झारखंड मूल के प्रवासियों के लिए यह खबर चिंता का विषय बनी हुई है। विदेशों में रहने वाले भारतीय अक्सर अपने गृह राज्यों में शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर नजर रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया में बसने वाले कई भारतीय पेशेवर भारत की प्रशासनिक सेवाओं (Civil Services) के महत्व को समझते हैं और वहां होने वाली ऐसी अराजकता को योग्यता (Meritocracy) के साथ खिलवाड़ मानते हैं। सिडनी और मेलबर्न में सक्रिय भारतीय समुदायों के बीच यह चर्चा का विषय है कि क्या भारत की राज्य सरकारें अपने भविष्य यानी युवाओं को सुरक्षित वातावरण देने में विफल हो रही हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस की यह 'चुनिंदा संवेदनशीलता' आने वाले चुनावों में पार्टी के लिए भारी पड़ सकती है। एक तरफ जहां राहुल गांधी देश भर में छात्रों और युवाओं से जुड़ने के लिए 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' जैसे माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं, वहीं झारखंड जैसे राज्यों में छात्रों की अनदेखी पार्टी के नैरेटिव को कमजोर करती है। क्या यह कांग्रेस की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है या राज्य सरकार के भीतर गठबंधन की मजबूरियों का परिणाम, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, झारखंड के छात्र न्याय की उम्मीद में डटे हुए हैं और सरकार से ठोस जवाब की मांग कर रहे हैं।
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