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कर्नाटक हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मुख्य अपराध में सजा के बाद मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा 'दोहरी मार' नहीं

ICN24 Newsroom 11 अग॰ 2026, 02:37 am
कर्नाटक हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मुख्य अपराध में सजा के बाद मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा 'दोहरी मार' नहीं

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मुख्य अपराध में सजा मिलने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) का मुकदमा चलाना संविधान के अनुच्छेद 20(2) का उल्लंघन नहीं है।

बेंगलुरु: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति को मूल अपराध (प्रेडिकेट ऑफेंस) के लिए दोषी ठहराया जा चुका है, तो उसके बाद धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मुकदमा चलाना 'दोहरी मार' (Double Jeopardy) नहीं माना जाएगा। न्यायालय के इस फैसले का भारत में वित्तीय अनुपालन और भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों के कार्यान्वयन पर दूरगामी प्रभाव पड़ने की संभावना है। न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्न की एकल पीठ ने एक याचिका को खारिज करते हुए यह निर्णय सुनाया। याचिकाकर्ता का तर्क था कि चूंकि उसे मुख्य अपराध (भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत) में पहले ही सजा मिल चुकी है, इसलिए उसी घटना से जुड़े धन शोधन के मामले में फिर से मुकदमा चलाना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20(2) के तहत दिए गए मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। अनुच्छेद 20(2) स्पष्ट करता है कि किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार अभियोजित और दंडित नहीं किया जाएगा। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि PMLA के तहत आने वाला अपराध और वह मूल अपराध जिससे 'अपराध की आय' (Proceeds of Crime) उत्पन्न हुई है, दोनों कानूनी रूप से भिन्न हैं। अदालत ने कहा कि मुख्य अपराध में दोषसिद्धि का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति को उस पैसे को ठिकाने लगाने या उसे वैध बनाने के प्रयासों के लिए सजा नहीं दी जा सकती। PMLA का उद्देश्य विशेष रूप से उन संपत्तियों और धन को जब्त करना और दंडित करना है जो आपराधिक गतिविधियों के माध्यम से अर्जित किए गए हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय और अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए यह कानूनी स्पष्टीकरण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। कई मामलों में, प्रवासी भारतीयों की भारत स्थित संपत्तियां या व्यवसाय पुराने कानूनी विवादों या वित्तीय जांच के दायरे में आ जाते हैं। यह निर्णय यह साफ करता है कि यदि भारत में किसी वित्तीय हेराफेरी के मामले में मुख्य सजा पूरी हो चुकी है, तब भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की अलग से जांच और मुकदमा जारी रख सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला जांच एजेंसियों के हाथ मजबूत करेगा। अक्सर आरोपी यह तर्क देकर बच निकलने की कोशिश करते हैं कि मुख्य मामले में फैसला आने के बाद PMLA की कार्यवाही बंद कर दी जानी चाहिए। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि धन शोधन एक स्वतंत्र अपराध है जो मुख्य अपराध के पूरा होने के बाद भी अस्तित्व में रह सकता है, यदि उस अपराध से अर्जित धन का उपयोग किया गया है। अदालत ने उच्चतम न्यायालय के पिछले निर्णयों का हवाला देते हुए दोहराया कि PMLA का ढांचा इस तरह से तैयार किया गया है कि यह आर्थिक अपराधों की जड़ों पर प्रहार कर सके। इस फैसले से यह संदेश गया है कि वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में केवल मुख्य अपराध की सजा काट लेना ही काफी नहीं है; अवैध रूप से अर्जित संपत्ति का हिसाब भी कानून के दायरे में देना होगा। आईसीएस24 (ICN24) की सलाह है कि भारत में निवेश करने वाले प्रवासी भारतीय अपने वित्तीय रिकॉर्ड और अनुपालन को दुरुस्त रखें, क्योंकि भारतीय कानून अब वित्तीय अपराधों के प्रति और भी सख्त रुख अपना रहा है।
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