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मुंबई: बोरीवली में बचाए गए मोर को मेडिकल जांच के बाद सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया
ICN24 Newsroom 10 अग॰ 2026, 10:37 pm

मुंबई के गोराई इलाके में स्थित विपश्यना पैगोडा के पास से बचाए गए एक मोर को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद सफलतापूर्वक जंगल में वापस छोड़ दिया गया है।
मुंबई के उत्तर-पश्चिमी उपनगर बोरीवली के पास स्थित गोराई इलाके से एक सुखद खबर सामने आई है। यहाँ के प्रसिद्ध ग्लोबल विपश्यना पैगोडा क्षेत्र से रेस्क्यू किए गए एक मोर को रविवार को पूरी तरह स्वस्थ घोषित किए जाने के बाद फिर से प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। इस बचाव और पुनर्वास अभियान को महाराष्ट्र वन विभाग और एनजीओ 'एसएआरआरपी इंडिया' (SARRP India) के सदस्यों ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ दिनों पहले उत्तर मुंबई के उत्तन और गोराई के सीमावर्ती इलाके में स्थित विपश्यना पैगोडा के पास यह मोर असहाय अवस्था में पाया गया था। स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों की सूचना पर वन विभाग की टीम और वन्यजीव प्रेमियों की संस्था एसएआरआरपी के स्वयंसेवक तुरंत मौके पर पहुंचे। प्राथमिक जांच में पक्षी को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया ताकि उसकी शारीरिक स्थिति का गहन आकलन किया जा सके।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बचाव के समय मोर काफी तनाव में लग रहा था, जिसके बाद उसे चिकित्सा निगरानी में रखा गया। पशु चिकित्सकों द्वारा की गई विस्तृत जांच में पाया गया कि मोर को कोई गंभीर चोट नहीं आई थी, लेकिन उसे कुछ समय के लिए आराम और उचित आहार की आवश्यकता थी। रविवार को जब विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि मोर अब पूरी तरह उड़ने और खुद का बचाव करने में सक्षम है, तो उसे उसके प्राकृतिक आवास के करीब एक सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया।
मुंबई जैसे घने शहरी आबादी वाले शहर में वन्यजीवों का संरक्षण एक बड़ी चुनौती है। बोरीवली का संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (SGNP) और उसके आसपास के गोराई व उत्तन जैसे हरित क्षेत्र कई जंगली प्रजातियों का घर हैं। भारत के राष्ट्रीय पक्षी, मोर की सुरक्षा और उसका इस तरह सफलतापूर्वक जंगल में लौटना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
एसएआरआरपी इंडिया के एक सदस्य ने बताया कि अक्सर शहरी क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के हमले या बिजली के तारों की चपेट में आने से ये पक्षी घायल हो जाते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि उन्हें कोई घायल पक्षी या जानवर मिले, तो वे तुरंत अधिकृत हेल्पलाइन या वन विभाग को सूचित करें।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। जिस तरह ऑस्ट्रेलिया में 'वायर्स' (WIRES) जैसी संस्थाएं कंगारू और कोआला जैसे जीवों के बचाव के लिए समर्पित हैं, भारत में भी अब वन्यजीव बचाव के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। ग्लोबल विपश्यना पैगोडा, जो दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है, के आसपास की जैव विविधता को बचाए रखना न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी बल्कि सांस्कृतिक विरासत के लिए भी जरूरी है।
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