राजनीति
ईरानी अखबार की ‘रिवेंज लिस्ट’ से बढ़ा तनाव: ट्रंप और नेतन्याहू समेत कई अंतरराष्ट्रीय नेता निशाने पर
ICN24 Newsroom 13 जुल॰ 2026, 04:31 pm

ईरान के एक कट्टरपंथी अखबार ने ट्रंप और नेतन्याहू जैसे बड़े नेताओं की एक 'रिवेंज लिस्ट' जारी की है, जिससे वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। ईरान के एक कट्टरपंथी रुख वाले प्रमुख अखबार ने हाल ही में एक विवादित इन्फोग्राफिक प्रकाशित किया है, जिसे 'रिवेंज लिस्ट' या 'बदले की सूची' का नाम दिया गया है। इस सूची में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सहित कई बड़े अंतरराष्ट्रीय नेताओं के नाम और तस्वीरें शामिल हैं। इस कदम ने न केवल कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया है।
अखबार द्वारा साझा किए गए इस इन्फोग्राफिक में उन व्यक्तियों को लक्षित किया गया है जिन्हें ईरान अपने शीर्ष सैन्य कमांडरों, विशेष रूप से जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के लिए जिम्मेदार मानता है। सुलेमानी की 2020 में एक अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत हो गई थी, जिसके बाद से ही ईरान लगातार बदला लेने की धमकी देता रहा है। सूची में केवल ट्रंप और नेतन्याहू ही नहीं, बल्कि अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और कई सैन्य अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। अखबार का दावा है कि ये सभी लोग ईरान के 'न्याय' के दायरे में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की मीडिया द्वारा इस तरह की सामग्री का प्रकाशन महज प्रोपेगेंडा नहीं है, बल्कि यह ईरान के भीतर बढ़ते कट्टरपंथी दबाव को भी दर्शाता है। हाल के महीनों में मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, विशेष रूप से इजरायल-हमास संघर्ष और लाल सागर में जहाजों पर हो रहे हमलों के बीच इस तरह की धमकियां वैश्विक अस्थिरता को और बढ़ा सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि यह सूची जारी करना ईरान की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह मनोवैज्ञानिक युद्ध के जरिए अपने विरोधियों पर दबाव बनाए रखना चाहता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर चिंता का विषय है। मध्य पूर्व में किसी भी प्रकार का बड़ा संघर्ष सीधे तौर पर वैश्विक तेल कीमतों को प्रभावित करता है, जिसका असर ऑस्ट्रेलिया में ईंधन की कीमतों और महंगाई पर पड़ता है। इसके अलावा, खाड़ी देशों में लाखों भारतीय प्रवासी कार्यरत हैं और वहां अस्थिरता होने पर उनके हितों और सुरक्षा पर आंच आ सकती है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया की विदेश नीति भी इस क्षेत्र में काफी सक्रिय रही है।
फिलहाल, अमेरिका और इजरायल की ओर से इस विशिष्ट सूची पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन दोनों देशों ने ईरान को किसी भी प्रकार की उकसावे वाली कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी दी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस भड़काऊ कदम पर क्या प्रतिक्रिया देता है। कूटनीतिक स्तर पर इस तरह की सूचियों का प्रकाशन शांति प्रयासों में एक बड़ी बाधा माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में तनाव और अधिक बढ़ने की संभावना है।
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