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भारत का 'किलों वाला राज्य': राजस्थान नहीं, इस प्रदेश में हैं सबसे ज्यादा ऐतिहासिक दुर्ग

ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 03:01 pm
भारत का 'किलों वाला राज्य': राजस्थान नहीं, इस प्रदेश में हैं सबसे ज्यादा ऐतिहासिक दुर्ग

आम धारणा के विपरीत, राजस्थान भारत में सबसे अधिक किलों वाला राज्य नहीं है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र इस सूची में शीर्ष पर है।

भारत का इतिहास अपनी भव्यता और वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। जब भी किलों और महलों की बात आती है, तो अधिकांश लोगों के मन में सबसे पहले राजस्थान का नाम आता है। हालांकि, ऐतिहासिक तथ्यों और सांख्यिकी के आधार पर यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, भारत में सबसे ज्यादा किले राजस्थान में नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में स्थित हैं। महाराष्ट्र का गौरवशाली इतिहास छत्रपति शिवाजी महाराज और मराठा साम्राज्य से गहराई से जुड़ा हुआ है। राज्य में किलों की संख्या 450 से अधिक है, जो इसे देश का सबसे अधिक दुर्गों वाला राज्य बनाती है। इसके विपरीत, राजस्थान में किलों की संख्या लगभग 100 से 150 के बीच मानी जाती है। हालांकि राजस्थान के किले अपनी नक्काशी और भव्य महलों के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन सैन्य रणनीति और भौगोलिक विस्तार के मामले में महाराष्ट्र के किलों का कोई सानी नहीं है। महाराष्ट्र के किलों की एक मुख्य विशेषता उनकी विविधता है। यहाँ कोंकण तट पर स्थित जंजीरा और सिंधुदुर्ग जैसे जल-दुर्ग हैं, तो वहीं सह्याद्रि की पहाड़ियों पर स्थित रायगढ़, राजगढ़ और प्रतापगढ़ जैसे पहाड़ी किले भी हैं। ये किले न केवल स्थापत्य कला के नमूने हैं, बल्कि मराठा काल की सैन्य कुशलता के प्रतीक भी हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से मराठी प्रवासियों के लिए, ये किले उनकी सांस्कृतिक पहचान और विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अक्सर इन किलों की गाथाएं सुनाई जाती हैं। मध्य प्रदेश इस सूची में तीसरे स्थान पर आता है, जहाँ ग्वालियर और मांडू जैसे ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं। राजस्थान के किलों की लोकप्रियता का मुख्य कारण उनका पर्यटन के अनुकूल होना और वहां के महलों की विलासिता है। चित्तौड़गढ़ और कुंभलगढ़ जैसे किले निश्चित रूप से विशाल हैं, लेकिन संख्या बल के मामले में महाराष्ट्र निर्विवाद रूप से आगे है। विशेषज्ञों का मानना है कि किलों की यह संख्या केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उस काल की सुरक्षा प्रणालियों को दर्शाती है। महाराष्ट्र के किलों को मुख्य रूप से रक्षात्मक दृष्टिकोण से बनाया गया था, जबकि राजस्थान के कई किले रियासतों की शान और शौकत का केंद्र थे। आज के समय में, ये ऐतिहासिक स्थल न केवल भारत के गौरव हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय इतिहास की गहरी पैठ को भी दर्शाते हैं।
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