राजनीति
भारत और रवांडा ने रक्षा संबंधों को दी नई ऊँचाई; नई दिल्ली में दूसरी JDCC बैठक के दौरान हुए कई अहम समझौते
ICN24 Newsroom 9 जुल॰ 2026, 01:31 am

नई दिल्ली में आयोजित दूसरी भारत-रवांडा संयुक्त रक्षा सहयोग समिति की बैठक में दोनों देशों ने सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा औद्योगिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
नई दिल्ली: भारत और रवांडा ने अपने द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को एक नई दिशा देते हुए सैन्य सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का संकल्प लिया है। 06 और 07 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित दूसरी भारत-रवांडा संयुक्त रक्षा सहयोग समिति (JDCC) की बैठक में दोनों देशों के उच्चाधिकारियों ने रक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में आपसी समन्वय बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सागर' (SAGAR) विजन और अफ्रीका के साथ भारत के बढ़ते रणनीतिक संबंधों की कड़ी में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।
दो दिवसीय इस बैठक के दौरान, भारतीय और रवांडा के प्रतिनिधिमंडलों ने मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों और क्षेत्रीय स्थिरता पर विचार-विमर्श किया। दोनों पक्षों ने सैन्य प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, और रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग को लेकर ठोस सहमति व्यक्त की। भारतीय रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य रवांडा के सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण में सहायता करना और भारतीय रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए नए अवसर तलाशना है। भारत ने रवांडा को अपनी 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत विकसित आधुनिक सैन्य तकनीक और उपकरणों की पेशकश भी की है।
बैठक में रक्षा औद्योगिक सहयोग को प्राथमिकता दी गई। भारत ने रवांडा को भरोसा दिलाया कि वह रक्षा उत्पादन में अपनी विशेषज्ञता साझा करने के लिए तैयार है, जो रवांडा की रक्षा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा। इसके अलावा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में सूचनाओं के आदान-प्रदान पर भी चर्चा हुई। रवांडा, जो पूर्वी अफ्रीका में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा भागीदार के रूप में उभरा है, ने भारत के प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सैन्य संस्थानों में अपने कैडेटों की भागीदारी बढ़ाने की इच्छा जताई।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भारत की यह वैश्विक सक्रियता विशेष महत्व रखती है। भारत जिस तरह से अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों में अपनी रक्षा कूटनीति का विस्तार कर रहा है, उससे वैश्विक मंच पर उसकी छवि एक 'नेट सुरक्षा प्रदाता' के रूप में मजबूत हुई है। ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ही हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं, और भारत का अफ्रीका के साथ जुड़ाव इस साझा रणनीतिक लक्ष्य को और सशक्त बनाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-रवांडा के बीच यह बढ़ता सहयोग न केवल द्विपक्षीय हितों को साधेगा, बल्कि यह ग्लोबल साउथ (Global South) की आवाज को भी बुलंद करेगा। दूसरी JDCC बैठक का सफल समापन दोनों देशों के बीच भरोसे और लंबे समय से चले आ रहे मित्रवत संबंधों का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में, इस साझेदारी के माध्यम से संयुक्त युद्धाभ्यास और तकनीकी हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में और अधिक प्रगति की उम्मीद है।
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