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उत्तराखंड: बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की जांच शुरू, चार सदस्यीय टीम गठित

ICN24 Newsroom 8 जुल॰ 2026, 08:31 pm
उत्तराखंड: बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की जांच शुरू, चार सदस्यीय टीम गठित

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने धाम में चढ़ावे के प्रबंधन में कथित धांधली की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई है। सोशल मीडिया पर उठे सवालों के बाद यह कदम उठाया गया है।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में चढ़ावे और दान के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च-स्तरीय चार सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है। यह कदम सोशल मीडिया पर वायरल हुई उन रिपोर्टों के बाद उठाया गया है, जिनमें मंदिर के दान पात्रों और भक्तों द्वारा दिए जाने वाले सीधे चढ़ावे के प्रबंधन में धांधली की आशंका जताई गई थी। बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मंदिर की पवित्रता और वित्तीय पारदर्शिता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच टीम को सभी पहलुओं की सूक्ष्मता से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। यह जांच न केवल वर्तमान वित्तीय वर्ष के रिकॉर्ड पर केंद्रित होगी, बल्कि पिछले कुछ समय के प्रबंधन ढांचे की भी समीक्षा करेगी। समिति में वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे। बदरीनाथ धाम हिंदू धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है और हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं। हाल के वर्षों में ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया भर से आने वाले भारतीय प्रवासियों की संख्या में भी भारी वृद्धि हुई है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे ऑस्ट्रेलियाई शहरों में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोग अक्सर मंदिर की धर्मार्थ गतिविधियों में उदारतापूर्वक दान देते हैं। ऐसे में प्रबंधन पर उठने वाले सवाल प्रवासी भारतीयों के बीच भी चिंता का विषय बन जाते हैं, जो अपनी आस्था और मेहनत की कमाई इन धार्मिक संस्थानों को समर्पित करते हैं। जांच टीम का मुख्य कार्य उन दावों की सत्यता की जांच करना है जिनमें कहा गया था कि चढ़ावे की गिनती और जमा करने की प्रक्रिया में निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो और पोस्ट में यह संकेत दिया गया था कि मंदिर प्रशासन के कुछ कर्मचारी या उससे जुड़े लोग इस प्रक्रिया में अनियमितता कर रहे हैं। हालांकि, मंदिर समिति ने अभी तक किसी व्यक्ति विशेष का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन आश्वासन दिया है कि यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड में चारधाम यात्रा अपने चरम पर है और मंदिर की व्यवस्थाओं पर प्रशासन का पूरा ध्यान केंद्रित है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, जो अक्सर उत्तराखंड के पर्यटन और आध्यात्मिक इकोसिस्टम से जुड़ा रहता है, यह खबर पारदर्शिता की मांग को और मजबूती देती है। स्थानीय प्रशासन का मानना है कि इस जांच से मंदिर प्रबंधन के प्रति जनता और वैश्विक भक्तों का विश्वास और मजबूत होगा। जांच टीम को जल्द से जल्द अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
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