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झारखंड से दुबई पहुंची ‘आम्रपाली’ की मिठास: APEDA ने सुगम बनाया आम का निर्यात
ICN24 Newsroom 8 जुल॰ 2026, 11:31 pm
झारखंड के जनजातीय क्षेत्रों से उपजे 2 मीट्रिक टन आम्रपाली आम अब दुबई के बाजारों की शोभा बढ़ाएंगे, जिसे APEDA के सहयोग से निर्यात किया गया है।
भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए, झारखंड के रसीले 'आम्रपाली' आमों की पहली बड़ी खेप दुबई के लिए रवाना की गई है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तत्वावधान में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने इस 2 मीट्रिक टन (MT) निर्यात को सुगम बनाने में मुख्य भूमिका निभाई है। यह कदम न केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय आमों की पैठ को मजबूत करता है, बल्कि झारखंड के स्थानीय और जनजातीय किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि के नए द्वार भी खोलता है।
आम्रपाली आम अपनी विशेष मिठास, गहरे नारंगी रंग के गुदे और कम रेशे के लिए जाना जाता है। झारखंड की जलवायु इस विशिष्ट किस्म के लिए अत्यंत अनुकूल मानी जाती है। दुबई जैसे प्रतिस्पर्धी बाजार में इन आमों की मांग भारत की कृषि-विविधता और गुणवत्ता मानकों पर वैश्विक भरोसे को दर्शाती है। APEDA ने इस पूरी प्रक्रिया में गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स सहायता प्रदान की है ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों का सख्ती से पालन किया जा सके।
इस निर्यात का महत्व केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। झारखंड के विभिन्न जिलों, विशेषकर जनजातीय बहुल क्षेत्रों में आम की खेती आजीविका का एक प्रमुख साधन बनती जा रही है। स्थानीय किसान समूहों और सहकारी समितियों को प्रत्यक्ष रूप से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़कर, सरकार बिचौलियों की भूमिका को कम करने और किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह का सहयोग जारी रहा, तो आने वाले समय में झारखंड भारत के 'मैंगो हब' के रूप में उभर सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर उत्साहजनक है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय आमों के आयात के लिए कड़े जैव-सुरक्षा (biosecurity) नियम लागू हैं, लेकिन इस तरह के सफल निर्यात अभियान दर्शाते हैं कि भारतीय उत्पाद अब वैश्विक गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए तैयार हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय अक्सर भारत के क्षेत्रीय फलों, विशेषकर आम्रपाली और मालदा जैसी किस्मों की कमी महसूस करते हैं। खाड़ी देशों में सफल आपूर्ति के बाद, अब ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों के लिए भी रास्ते खुलने की उम्मीद जगी है।
आने वाले महीनों में APEDA का लक्ष्य अन्य वैश्विक बाजारों, जैसे दक्षिण-पूर्व एशिया और यूरोप में भी झारखंड के कृषि उत्पादों का विस्तार करना है। बुनियादी ढांचे में सुधार, जैसे पैक-हाउस का निर्माण और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं के विस्तार से निर्यात की क्षमता में भारी वृद्धि होने की संभावना है। यह पहल 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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