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निज्जर मामला: अमेरिकी रिपोर्ट ने कनाडा के दावों पर उठाए सवाल, ट्रूडो सरकार के आरोपों की साख पर संकट
ICN24 Newsroom 9 जुल॰ 2026, 03:31 am

हालिया अमेरिकी रिपोर्टों ने कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो के उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं जिसमें उन्होंने निज्जर हत्याकांड में भारत का हाथ होने का आरोप लगाया था।
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा भारत सरकार पर लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर एक नया मोड़ आया है। हालिया अमेरिकी रिपोर्टों और कानूनी दस्तावेजों के विश्लेषण से यह संकेत मिल रहे हैं कि हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार की प्रत्यक्ष संलिप्तता के कनाडा के दावे ठोस सबूतों पर आधारित नहीं थे। इस घटनाक्रम ने न केवल भारत और कनाडा के कूटनीतिक रिश्तों को सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर कनाडा की जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
सितंबर 2023 में कनाडाई संसद में जस्टिन ट्रूडो ने दावा किया था कि उनके पास निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों के शामिल होने के 'विश्वसनीय आरोप' हैं। भारत ने शुरू से ही इन आरोपों को 'बेतुका और प्रेरित' बताकर खारिज कर दिया था। अब अमेरिकी अभियोग (indictment) और जांच के संदर्भ में सामने आ रही जानकारियों से पता चलता है कि कनाडा ने बिना किसी पुख्ता न्यायिक प्रमाण के राजनीतिक लाभ के लिए यह आरोप लगाए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि खालिस्तानी तत्वों को खुश करने की ट्रूडो की नीति ने भारत के साथ दशकों पुराने संबंधों को दांव पर लगा दिया है।
इस कूटनीतिक विवाद का असर केवल भारत और कनाडा तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रह रहे भारतीय समुदाय पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ा है। ऑस्ट्रेलिया में एक बड़ी भारतीय आबादी निवास करती है, जो दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा और पर्यटन के माध्यम से जुड़ी हुई है। सिडनी और मेलबर्न में रहने वाले प्रवासी भारतीयों ने इस तनाव के दौरान असुरक्षा और कूटनीतिक अनिश्चितता का सामना किया है। हालिया रिपोर्टों से मिली राहत के बाद, ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय में यह उम्मीद जगी है कि अब स्थिति में सुधार होगा और निराधार आरोपों के कारण पैदा हुई कड़वाहट कम होगी।
भारत ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि कनाडा में सक्रिय चरमपंथी तत्वों को वहां की सरकार द्वारा दी जा रही राजनीतिक शरण दोनों देशों के सुरक्षा हितों के खिलाफ है। अमेरिकी जांच रिपोर्टों में जिस तरह की बारीकियों का उल्लेख है, वह कनाडा के दावों से मेल नहीं खातीं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कनाडा ने अपनी खुफिया जानकारी साझा करने में पारदर्शिता नहीं बरती और केवल धारणाओं के आधार पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि खराब करने की कोशिश की।
वर्तमान में भारत और कनाडा के बीच राजनयिक उपस्थिति काफी कम हो गई है और वीजा सेवाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। हालांकि, नई रिपोर्टों के बाद अब गेंद कनाडा के पाले में है कि वह अपने आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करे या अपनी गलती स्वीकार कर संबंधों को पटरी पर लाने की पहल करे। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता के खिलाफ किसी भी निराधार आरोप को बर्दाश्त नहीं करेगा और न्यायोचित कार्रवाई की उम्मीद रखता है।
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