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IIT मद्रास ने की पहले ब्रिक्स न्यूरोसाइंस सिम्पोजियम की मेजबानी, 'ह्यूमन ब्रेनस्टेम एटलस' का किया अनावरण
ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 09:00 pm

IIT मद्रास ने भारत के पहले ब्रिक्स न्यूरोसाइंस सिम्पोजियम की मेजबानी की और चिकित्सा जगत के लिए महत्वपूर्ण 'ह्यूमन ब्रेनस्टेम एटलस' जारी किया।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास ने भारत में पहले ब्रिक्स (BRICS) न्यूरोसाइंस सिम्पोजियम की मेजबानी कर वैज्ञानिक जगत में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के दौरान संस्थान ने 'ह्यूमन ब्रेनस्टेम एटलस' (Human Brainstem Atlas) का भी अनावरण किया, जिसे न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। यह पहल वैश्विक स्तर पर मस्तिष्क अनुसंधान और सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है।
इस सिम्पोजियम में ब्रिक्स देशों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—के प्रमुख वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 'ह्यूमन ब्रेनस्टेम एटलस' रहा, जो मानव मस्तिष्क के सबसे जटिल हिस्सों में से एक की विस्तृत मैपिंग प्रदान करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एटलस पार्किंसंस, अल्जाइमर और अन्य न्यूरोलॉजिकल विकारों के उपचार में नई राहें खोल सकता है।
IIT मद्रास के विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना डेटा-संचालित चिकित्सा और सटीक निदान की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय मूल के कई डॉक्टर और शोधकर्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्यूरोसाइंस परियोजनाओं में सक्रिय हैं। यह एटलस न केवल भारत, बल्कि ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी चिकित्सा अनुसंधान के लिए एक बहुमूल्य संसाधन साबित होगा।
ऑस्ट्रेलिया में काम कर रहे भारतीय वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए इस तरह के डेटा तक पहुंच होना वैश्विक अनुसंधान सहयोग को और मजबूत करेगा। सिम्पोजियम ने न केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों का जश्न मनाया, बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच तकनीकी और शैक्षणिक साझेदारी की नींव को भी पुख्ता किया।
अंत में, IIT मद्रास द्वारा किया गया यह नवाचार वैश्विक स्वास्थ्य परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। यह एटलस अब दुनिया भर के शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध होगा, जिससे मानव मस्तिष्क की जटिलताओं को समझने में मदद मिलेगी और भविष्य में गंभीर बीमारियों के लिए अधिक प्रभावी उपचार विकसित किए जा सकेंगे।
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