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हिमाचल प्रदेश में मौसम का दोहरा मिजाज: 10 जिलों में आंधी-तूफान का अलर्ट, ऊना में पारा 38 डिग्री के पार
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 03:26 pm
हिमाचल प्रदेश में गर्मी और बारिश का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए 10 जिलों में आंधी-तूफान का येलो अलर्ट जारी किया है।
हिमाचल प्रदेश में मौसम इन दिनों दोहरे मिजाज दिखा रहा है। जहां एक तरफ मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मौसम विभाग ने प्रदेश के 10 जिलों में आंधी-तूफान और बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। शनिवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में धूप खिली रही, जिसके कारण औसत अधिकतम तापमान में 1.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस बढ़त के साथ ही ऊना जिला 38.0 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ राज्य का सबसे गर्म इलाका बन गया है।
शिमला स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले 48 घंटों के दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम का रुख बदलने वाला है। विभाग ने रविवार और सोमवार के लिए प्रदेश के 10 जिलों में गरज के साथ बौछारें और तेज हवाएं चलने का 'येलो अलर्ट' जारी किया है। जिन जिलों के लिए यह चेतावनी जारी की गई है, उनमें कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन, सिरमौर, चंबा, ऊना, बिलासपुर और हमीरपुर शामिल हैं। लाहौल-स्पीति और किन्नौर जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत शांत रहने की उम्मीद है।
तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो शनिवार को कांगड़ा में सबसे अधिक उछाल देखने को मिला, जहां पारा 4.4 डिग्री बढ़कर 34.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। पर्यटन नगरी मनाली में भी तापमान में 3.0 डिग्री का इजाफा हुआ, जिससे वहां का अधिकतम तापमान 26.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजधानी शिमला में तापमान 27.0 डिग्री और भुंतर में 33.6 डिग्री सेल्सियस रहा। गर्मी के इस अचानक बढ़ते प्रभाव ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण है, खासकर उनके लिए जो इन दिनों भारत यात्रा की योजना बना रहे हैं या जिनके परिवार हिमाचल के इन जिलों में रहते हैं। जून का महीना आमतौर पर उत्तर भारत में छुट्टियों का समय होता है, और बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय इस दौरान पहाड़ों का रुख करते हैं। मौसम विभाग ने पर्यटकों को सलाह दी है कि वे ऊंचे पहाड़ी रास्तों पर जाने से पहले स्थानीय मौसम की जानकारी अवश्य लें, क्योंकि आंधी और बारिश के कारण भूस्खलन और सड़कों के अवरुद्ध होने का खतरा बना रहता है।
खेती और बागवानी के दृष्टिकोण से भी यह मौसम काफी संवेदनशील है। अचानक आने वाले आंधी-तूफान से फलों के बगीचों, विशेष रूप से सेब और गुठलीदार फलों की फसल को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने किसानों को अपनी कटी हुई फसल सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी है। प्रदेश सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने भी सभी जिला अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। अगले कुछ दिनों तक तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।
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