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मेक्सिको के ऐतिहासिक लो-कार्बन मेथेनॉल प्रोजेक्ट के लिए 'हर्टे पेट्रोकेम' प्रदान करेगा अत्याधुनिक इलेक्ट्रिकल फर्नेस तकनीक
ICN24 Newsroom 7 जुल॰ 2026, 06:31 am

हर्टे पेट्रोकेम मेक्सिको में दुनिया के सबसे बड़े लो-कार्बन मेथेनॉल संयंत्र के लिए उन्नत इलेक्ट्रिकल फर्नेस तकनीक की आपूर्ति करेगा, जिसका लक्ष्य 2030 तक उत्पादन शुरू करना है।
वैश्विक ऊर्जा संक्रमण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, हर्टे पेट्रोकेम (Heurtey Petrochem) को मेक्सिको में एक ऐतिहासिक लो-कार्बन मेथेनॉल परियोजना के लिए अपनी उन्नत इलेक्ट्रिकल फर्नेस तकनीक प्रदान करने के लिए चुना गया है। यह परियोजना टोपोलोबैम्पो (Topolobampo) के पास स्थित होगी और इसे दुनिया के सबसे बड़े लो-कार्बन मेथेनॉल उत्पादन केंद्रों में से एक माना जा रहा है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लक्ष्य वर्ष 2030 तक परिचालन शुरू करना है। एक बार पूरी तरह से चालू हो जाने के बाद, इस संयंत्र से प्रतिदिन लगभग 6,130 मीट्रिक टन मेथेनॉल का उत्पादन होने की उम्मीद है। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका पर्यावरणीय दृष्टिकोण है। पारंपरिक मेथेनॉल उत्पादन प्रक्रियाओं के विपरीत, जो जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भर होती हैं, यह नया प्रोजेक्ट कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम करने के लिए हर्टे पेट्रोकेम की इलेक्ट्रिकल फर्नेस तकनीक का उपयोग करेगा। यह तकनीक रासायनिक प्रक्रियाओं में गर्मी पैदा करने के लिए बिजली का उपयोग करती है, जिससे प्रत्यक्ष कार्बन फुटप्रिंट में भारी कमी आती है।
मेथेनॉल का उपयोग भविष्य के स्वच्छ ईंधन के रूप में तेजी से बढ़ रहा है, विशेष रूप से शिपिंग और भारी उद्योगों में। मेक्सिको में यह विकास न केवल लैटिन अमेरिका के ऊर्जा परिदृश्य को बदलेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर स्थायी रसायनों के उत्पादन के लिए एक नया मानक भी स्थापित करेगा। हर्टे पेट्रोकेम का चयन उनके तकनीकी नवाचार और जटिल इंजीनियरिंग समाधान प्रदान करने की क्षमता को दर्शाता है, जो आधुनिक नेट-जीरो लक्ष्यों के अनुरूप है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के पेशेवरों के लिए, विशेष रूप से सिडनी, मेलबर्न और पर्थ में ऊर्जा और संसाधन क्षेत्र में कार्यरत इंजीनियरों के लिए, यह परियोजना वैश्विक बाजार के रुझानों का एक स्पष्ट संकेत है। चूंकि ऑस्ट्रेलिया स्वयं हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया के क्षेत्र में अग्रणी बनने की कोशिश कर रहा है, इसलिए मेक्सिको जैसे देशों में इस तरह के बड़े पैमाने पर हो रहे तकनीकी बदलाव भारतीय मूल के विशेषज्ञों के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं। ऑस्ट्रेलियाई संसाधन क्षेत्र में काम करने वाले कई भारतीय इंजीनियर पहले से ही कार्बन कैप्चर और इलेक्ट्रिफिकेशन तकनीकों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, और इस तरह के वैश्विक प्रोजेक्ट उनके अनुभव और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 की समय सीमा महत्वाकांक्षी है, लेकिन आवश्यक भी है। जैसे-जैसे दुनिया पेरिस समझौते के लक्ष्यों की ओर बढ़ रही है, औद्योगिक प्रक्रियाओं का विद्युतीकरण (Electrification) सबसे प्रभावी समाधानों में से एक बनकर उभरा है। हर्टे पेट्रोकेम और मेक्सिकन परियोजना के बीच यह साझेदारी इसी दिशा में एक मील का पत्थर है, जो आने वाले दशकों में रासायनिक उद्योग के भविष्य को परिभाषित करेगी।
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