राजनीति
हरियाणा में आशा कार्यकर्ताओं का विशाल प्रदर्शन: वेतन वृद्धि और नियमितीकरण की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा
ICN24 Newsroom 29 जुल॰ 2026, 04:37 pm

हरियाणा में हजारों आशा कार्यकर्ताओं ने बेहतर मानदेय और सरकारी कर्मचारी के दर्जे की मांग को लेकर राज्यव्यापी प्रदर्शन शुरू किया है।
हरियाणा के विभिन्न जिलों में मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) अपनी लंबित मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आई हैं। राज्य के स्वास्थ्य ढांचे की रीढ़ मानी जाने वाली इन महिला कार्यकर्ताओं ने न्यूनतम वेतन में वृद्धि, नौकरी की सुरक्षा और उन्हें सरकारी कर्मचारी के रूप में मान्यता देने की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद की है। रोहतक, हिसार, और पंचकूला जैसे प्रमुख केंद्रों में प्रदर्शनकारियों ने जिला मुख्यालयों का घेराव किया और सरकार विरोधी नारे लगाए।
आशा कार्यकर्ताओं का प्राथमिक विरोध उनके वर्तमान मानदेय (Honorarium) को लेकर है, जिसे वे आज की महंगाई के दौर में बेहद कम और अपमानजनक मानती हैं। वर्तमान में, इन कार्यकर्ताओं को एक निश्चित मासिक मानदेय और विशिष्ट कार्यों के आधार पर प्रोत्साहन राशि दी जाती है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि उन्हें कम से कम 26,000 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन दिया जाए और उन्हें सरकारी सेवा नियमों के तहत लाया जाए ताकि वे सेवानिवृत्ति के लाभ और सामाजिक सुरक्षा का लाभ उठा सकें।
आंदोलनकारी नेताओं का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर घर-घर जाकर सेवाएं दीं, लेकिन सरकार ने उनके योगदान की सराहना तो की पर उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। इसके अलावा, डिजिटल इंडिया पहल के तहत उन पर स्मार्टफोन के माध्यम से डेटा एंट्री का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है, जबकि इसके लिए उन्हें कोई अतिरिक्त प्रशिक्षण या उचित उपकरण नहीं दिए गए हैं। कई कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें समय पर मानदेय भी नहीं मिलता, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि हरियाणा से ताल्लुक रखने वाले कई प्रवासियों के परिवार ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, जहाँ प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह इन आशा कार्यकर्ताओं पर निर्भर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण, प्रसव पूर्व देखभाल और संक्रामक रोगों की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण कार्य इन कार्यकर्ताओं के माध्यम से ही होते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में इस तरह के व्यवधान का सीधा असर ग्रामीण आबादी की स्वास्थ्य सुरक्षा पर पड़ सकता है।
फिलहाल, हरियाणा सरकार ने कार्यकर्ताओं से काम पर लौटने की अपील की है और बातचीत का आश्वासन दिया है। हालांकि, यूनियन नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं होते, तब तक वे अपना धरना और प्रदर्शन जारी रखेंगी। इस विरोध प्रदर्शन के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्वास्थ्य केंद्र प्रभावित हुए हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
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