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भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर: जानें प्रमुख शहरों के दाम और वैश्विक बाजार का रुख
ICN24 Newsroom 29 जुल॰ 2026, 04:35 pm

भारत में आज ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के बीच घरेलू तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे हैं।
भारत के प्रमुख महानगरों और राज्यों में आज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं दर्ज किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने लगातार स्थिरता बनाए रखी है, जिससे आम जनता और परिवहन क्षेत्र को बड़ी राहत मिली है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर आर्थिक राजधानी मुंबई तक, ईंधन के दाम अपने पुराने स्तर पर ही बने हुए हैं।
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत वर्तमान में 94.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। वहीं, मुंबई में पेट्रोल 103.44 रुपये और डीजल 89.97 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में भी कीमतों में किसी बड़े फेरबदल की सूचना नहीं है। भारत में ईंधन की कीमतें दैनिक आधार पर संशोधित की जाती हैं, लेकिन पिछले कुछ महीनों से इनमें कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई (WTI) की कीमतें वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और मांग में कमी के संकेतों के बीच बदलती रहती हैं। भारतीय समुदाय, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे अनिवासी भारतीय (NRI), भारत में ईंधन की कीमतों पर बारीकी से नजर रखते हैं क्योंकि इसका सीधा असर भारत में रहने वाले उनके परिवारों के खर्च और देश की मुद्रास्फीति (Inflation) पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बावजूद भारत में कीमतों में बड़ी कटौती न होने का मुख्य कारण तेल कंपनियों द्वारा पिछले घाटों की भरपाई करना है। जब कच्चे तेल की कीमतें बहुत अधिक थीं, तब कंपनियों ने घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखा था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा था। अब स्थिर कीमतों के माध्यम से वे अपने बही-खातों को संतुलित कर रही हैं।
इसके अतिरिक्त, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला उत्पाद शुल्क (Excise Duty) और राज्य सरकारों द्वारा वसूला जाने वाला वैट (VAT) भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अलग-अलग राज्यों में वैट की दरें अलग होने के कारण हर शहर में ईंधन की कीमतें भिन्न होती हैं। ऑस्ट्रेलिया के विपरीत, जहां ईंधन की कीमतें साप्ताहिक चक्र (Fuel Cycles) के आधार पर तेजी से बदलती हैं, भारत में सरकार और सार्वजनिक कंपनियां सामाजिक-आर्थिक स्थिरता को देखते हुए कीमतों को नियंत्रित करने का प्रयास करती हैं।
आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या केंद्र सरकार आगामी त्योहारों या चुनावी मौसम को देखते हुए कीमतों में किसी कटौती की घोषणा करती है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति और ओपेक (OPEC) देशों के फैसले ही भविष्य की दिशा तय करेंगे।
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