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पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल ने 'एलएडीसीएस' योजना को वापस लेने की मांग दोहराई; वकीलों का आंदोलन जारी

ICN24 Newsroom 29 जुल॰ 2026, 06:36 pm
पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल ने 'एलएडीसीएस' योजना को वापस लेने की मांग दोहराई; वकीलों का आंदोलन जारी

पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल ने कानूनी सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली (LADCS) के खिलाफ वकीलों के विरोध का समर्थन करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।

चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा में कानूनी बिरादरी के बीच बढ़ता तनाव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल की एक महत्वपूर्ण उप-समिति ने कानूनी सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली (Legal Aid Defense Counsel System - LADCS) के कार्यान्वयन के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के प्रति अपना पूर्ण समर्थन दोहराया है। बार काउंसिल, जो क्षेत्र के हजारों अधिवक्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाला एक आधिकारिक सांविधिक निकाय है, ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान स्वरूप में यह योजना वकीलों के हितों और न्याय प्रणाली की स्वतंत्रता के खिलाफ है। यह विवाद मुख्य रूप से 'एलएडीसीएस' (LADCS) योजना के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जिसे राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा शुरू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य आपराधिक मामलों में पात्र व्यक्तियों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए एक समर्पित सार्वजनिक रक्षक (Public Defender) प्रणाली बनाना है। हालांकि, पंजाब और हरियाणा के वकील इसे एक त्रुटिपूर्ण मॉडल मान रहे हैं। वकीलों का तर्क है कि यह प्रणाली न केवल निजी वकीलों के कार्यक्षेत्र को प्रभावित करेगी, बल्कि यह कानूनी सहायता की गुणवत्ता के साथ भी समझौता कर सकती है। बार काउंसिल की उप-समिति की हालिया बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि इस योजना को लागू करने से पहले जमीनी स्तर के हितधारकों से परामर्श नहीं किया गया। आंदोलनकारी वकीलों का कहना है कि यह योजना एक समानांतर न्यायिक ढांचा तैयार करने की कोशिश है, जिससे वकीलों की स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है। बार काउंसिल ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे इस योजना पर तुरंत रोक लगाएं और इसकी व्यापक समीक्षा करें। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। पंजाब और हरियाणा से ताल्लुक रखने वाले बड़ी संख्या में अनिवासी भारतीय (NRI) ऑस्ट्रेलिया में बसे हुए हैं। इनमें से कई लोगों के संपत्ति, पारिवारिक विवाद और अन्य दीवानी या आपराधिक मामले पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की अदालतों में लंबित हैं। वकीलों की हड़ताल और अदालती कार्यों के बहिष्कार से इन मामलों की सुनवाई में देरी हो रही है, जिससे प्रवासी भारतीयों को मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मुद्दे का जल्द समाधान नहीं निकला, तो अदालतों में मामलों का अंबार और बढ़ जाएगा। बार काउंसिल ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल, पूरे क्षेत्र की अदालतों में कामकाज आंशिक या पूर्ण रूप से प्रभावित है, और कानूनी जगत में इस सुधार बनाम अधिकार की लड़ाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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